Friday, August 31, 2018

टूटे ट्रैक का खुद पता लगाएगी ट्रेन, भारत में पहली बार इस तकनीक का इस्तेमाल

टूटे ट्रैक का खुद पता लगाएगी ट्रेन, भारत  में पहली बार इस तकनीक का इस्तेमाल...

भारत में पहली बार अधिकारियों ने रेल दुर्घटनाएं रोकने के लिए मुम्बई और अहमदाबाद को जोड़ने वाली 508 किलोमीटर लंबी बुलेट ट्रेन परियोजना के मार्गों में किसी भी प्रकार की दरार का पता लगाने वाली स्वचालित प्रणाली लगाने का फैसला किया है। बुलेट ट्रेनें आग का पता लगाने वाली उन्नत प्रणाली और डिब्बों को पटरी से उतरने से रोकने वाले उपायों से लैस होंगी तथा भूकंपजनित घटनाओं से भी पूरे बुलेट ट्रेन ढांचे को सुरक्षा मिलेगी।

बुलेट ट्रेन परियोजना का क्रियान्वयन करने वाली एजेंसी नेशनल हाईस्पीड रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड के अधिकारियों ने कहा कि यह प्रणाली सुरक्षा उपायों में एक अहम पहलू होगी। उन्होंने कहा कि वर्तमान रेल नेटवर्क में अब तक यह प्रौद्योगिकी नहीं अपनाई गई है। लेकिन 320 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार तक जाने वाली इन ट्रेनों में ऐसी प्रौद्योगिकी का उपयोग अहम हो जाता है।

कॉरपोरेशन की रिपोर्ट में कहा गया है, ‘यह प्रणाली रेलमार्गों में विद्युत नियंत्रण परिपथ का इस्तेमाल करेगी। नियंत्रण परिपथ में त्रुटि आने पर मार्ग में दरार की पहचान करने में मदद मिलेगी। इस प्रौद्योगिकी से रेलवे ट्रैक पर दरारों का पता लगाने के लिए नियमित निरीक्षण के दौरान लगने वाला काफी वक्त बचेगा। प्रति किलोमीटर इस प्रणाली पर क्या लागत आएगी, इसका आकलन किया जा रहा है लेकिन इस प्रौद्योगिकी को लगाने का फैसला पहले ही चुका है।

यहां पढ़ें पूरी खबर- http://v.duta.us/npUp7AAA

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Thursday, August 30, 2018

मैं शिक्षा को लेकर बहुत दुविधा में हूँ..

एक स्कूल का प्रिंसिपल जो जर्मनी में हिटलर के नाज़ी कैम्प से किसी तरह बच निकला था उसने लिखा है कि:
"मैं हिटलर के मृत्यु दंड वाले कैम्प से बच निकला था.. और मेरी आँखों ने वहाँ जो देखा था, मैं चाहता हूँ कि उसे दुनिया मे और कोई कभी न देखे..
उन कैम्प में मौत वाले गैस चैम्बरों को क़ाबिल इंजीनियरों द्वारा बनाया गया था.. क़ाबिल और कुशल डॉक्टर बच्चों को ज़हर देते थे.. प्रशिक्षित नर्सें नवजात बच्चों को जान से मारती थीं.. औरतें और बच्चों को कॉलेज से पढ़े हुवे ग्रेजुएट और डिग्री धारक गोली से मारते थे...
इसलिए ये सब देखने के बाद अब मैं शिक्षा को लेकर बहुत दुविधा में हूँ.. और मैं आप सब से विनती करता हूँ कि अपने विद्यार्थियों और बच्चों की मदद कीजिये इंसान बनने में.. और ध्यान दीजिए कि आपकी शिक्षा कहीं उन्हें प्रबुद्ध राक्षस, कुशल मनोरोगी और क़ाबिल पागल तो नहीं बना रही है?
पढ़ना, लिखना, भाषा, इतिहास, गणित तभी तक ज़रूरी है जब तक वो हमारे विद्यार्थियों में मानव मूल्य और इंसानियत का विकास करें.. अगर ये नहीं होता है तो सारी पढ़ाई बेकार है"
उपरोक्त कथन हर जाति, धर्म, वर्ग पर लागू हो रहा है आज के दौर में... इसलिए ध्यान से देखिये जो लोग आपको नफ़रत भरे मैसेज भेजते हैं व्हाट्सएप्प पर.. वो सब पढ़े लिखे, डॉक्टर, इंजीनियर और बड़े बड़े ओहदों पर काम करने वाले लोग हैं.. आपके आसपास के लोग इस समय प्रबुद्ध राक्षस, कुशल मनोरोगी और क़ाबिल पागल बन चुके हैं.. जब भी ऐसा मैसेज आपका कोई अपना भेजे तो उसे चेताईये.. आप उन मैसेज का कोई रिप्लाई नहीं करते हैं तो भेजने वाला जगता नहीं है और जब वो जागेगा नहीं तो उसे शर्म भी नहीं आएगी.. इसलिए रिप्लाई कीजिये ऐसे मैसेज का और उन्हें बोलिये कि वो आपको अपने जैसा "मनोरोगी" न बनाएं
पढ़े लिखे लोगों को उनकी मूर्छा से बाहर खींचिए।
🙏🙏🙏🙏🙏🙏