- राष्ट्रवादी (नेशनलिस्ट) वो होते हैं जो मानते हैं कि उनका देश जैसा भी है, वैसे ही रहने देना चाहिए, क्योंकि ज़्यादा परिवर्तन लाने से वो देश अपने रीति-रिवाज़ों को ही भूल जाएगा।
- राष्ट्रवाद का सबसे चरम रूप दक्षिणपंथ या फिर अंधराष्ट्रवाद (जिंगोइस्म) होता है।
- जो राष्ट्रवादी विचारधारा को नहीं मानता, उसे गैर राष्ट्रवादी (एन्टी-नेशनल) कहते है।
- अब समझ गए न, एन्टी-नेशनल, जो आज कल कुछ ज़्यादा ही फैशन में है, गलत नहीं होता। वो सिर्फ एक विचारधारा को नहीं मानता।
- लोगों को ये गलत फहमी है कि गैर-राष्ट्रवादी का मतलब देशद्रोही होता है। ऐसा नहीं है। तीनों विचारधाराएं देशभक्त होती हैं। वो प्रत्येक इंसान पर निर्भर करता है कि वो देशद्रोही है या नहीं। इसका विचारधारा से कुछ लेना देना नहीं है।
- राष्ट्रवादी देशों का अक्सर कोई राष्ट्रीय मज़हब होता है, क्योंकि उनका मानना है कि यही उनके राष्ट्र की पहचान है। जब वो दक्षिणपंथी होते हैं, तो उस धर्म का ग्रंथ ही उनका संविधान बन जाता है।
- राष्ट्रवादी देशों के उदाहरण - पाकिस्तान, सऊदी अरब, रूस (सोवियत संघ वामपंथी था लेकिन रूस राष्ट्रवादी है), अमेरिका आदि
- भारत की राष्ट्रवादी पार्टियों के उदाहरण - भाजपा, शिव सेना, एआईएमआईएम, एनसीपी, पीडीपी आदि
विचारधारा वर्ग से पैदा होती है, वर्ग का आशय, धन से जुड़ा होता है, ये धन वर्ग बनाता है, इसलिए मुख्य रूप से दुनियां में दो वर्ग है, एक पूँजीपति वर्ग, दूसरा मेहनत कश वर्ग, जिसमें मजदूर किसान, दुकानदार, आम जनता, जो बहु संख्यक होती है ।
इन दोनों वर्गो में अलग अलग प्रकार की ताकते होती है, पूँजीपति वर्ग के पास धन होता है, समाजवादी वर्ग के पास जन होता है मगर धन नही होता, इसलिए इन दोनों वर्गो में कभी भी, वर्ग संघर्ष खत्म नही होते, पूँजीपति वर्ग और ज्यादा धन पर काबिज होना चाहता है, वही समाज अपने जीवन को खुशहाल बनाने के लिए, अपने श्रम के दाम को बढ़ा कर खुशहाल रहना चाहता है ।
