Sunday, December 30, 2018

राष्ट्रवादी (नेशनलिस्ट)

  • राष्ट्रवादी (नेशनलिस्ट) वो होते हैं जो मानते हैं कि उनका देश जैसा भी है, वैसे ही रहने देना चाहिए, क्योंकि ज़्यादा परिवर्तन लाने से वो देश अपने रीति-रिवाज़ों को ही भूल जाएगा।
    • राष्ट्रवाद का सबसे चरम रूप दक्षिणपंथ या फिर अंधराष्ट्रवाद (जिंगोइस्म) होता है।
    • जो राष्ट्रवादी विचारधारा को नहीं मानता, उसे गैर राष्ट्रवादी (एन्टी-नेशनल) कहते है।
      • अब समझ गए न, एन्टी-नेशनल, जो आज कल कुछ ज़्यादा ही फैशन में है, गलत नहीं होता। वो सिर्फ एक विचारधारा को नहीं मानता।
      • लोगों को ये गलत फहमी है कि गैर-राष्ट्रवादी का मतलब देशद्रोही होता है। ऐसा नहीं है। तीनों विचारधाराएं देशभक्त होती हैं। वो प्रत्येक इंसान पर निर्भर करता है कि वो देशद्रोही है या नहीं। इसका विचारधारा से कुछ लेना देना नहीं है।
    • राष्ट्रवादी देशों का अक्सर कोई राष्ट्रीय मज़हब होता है, क्योंकि उनका मानना है कि यही उनके राष्ट्र की पहचान है। जब वो दक्षिणपंथी होते हैं, तो उस धर्म का ग्रंथ ही उनका संविधान बन जाता है।
    • राष्ट्रवादी देशों के उदाहरण - पाकिस्तान, सऊदी अरब, रूस (सोवियत संघ वामपंथी था लेकिन रूस राष्ट्रवादी है), अमेरिका आदि
    • भारत की राष्ट्रवादी पार्टियों के उदाहरण - भाजपा, शिव सेना, एआईएमआईएम, एनसीपी, पीडीपी आदि

वामपंथी विचारधारा क्या है ?

वामपंथी विचारधारा क्या है ।
नौजवान साथियों, पूरी दुनिया में दो प्रकार की व्यवस्थाऐ है, जिसमें एक पूंजीवादी व्यवस्था है और दूसरी समाजवादी व्यवस्था, यही व्यवस्थाऐ समाज चलाती है, इसी यही समाज अपनी एक राजसत्ता बनाती है, जिसको हम सरकार कहते है, हर सरकार एक राजनैतिक पार्टी बनाती है, जिसकी अपनी एक विचारधारा धारा होती है।
विचारधारा वर्ग से पैदा होती है, वर्ग का आशय, धन से जुड़ा होता है, ये धन वर्ग बनाता है, इसलिए मुख्य रूप से दुनियां में दो वर्ग है, एक पूँजीपति वर्ग, दूसरा मेहनत कश वर्ग, जिसमें मजदूर किसान, दुकानदार, आम जनता, जो बहु संख्यक होती है ।
इन दोनों वर्गो में अलग अलग प्रकार की ताकते होती है, पूँजीपति वर्ग के पास धन होता है, समाजवादी वर्ग के पास जन होता है मगर धन नही होता, इसलिए इन दोनों वर्गो में कभी भी, वर्ग संघर्ष खत्म नही होते, पूँजीपति वर्ग और ज्यादा धन पर काबिज होना चाहता है, वही समाज अपने जीवन को खुशहाल बनाने के लिए, अपने श्रम के दाम को बढ़ा कर खुशहाल रहना चाहता है ।
साथियों, यहाँ ये समझने की बात है कि दोनों वर्ग मिलकर ही समाज चलाते है, पूँजीवादी विचारधारा, कहती है कि देश को पूँजीपति वर्ग ही चलायेगा, समाजवादी समाज कहता है कि पूँजीपति वर्ग की जरूरत ही नहीं है । समाज ही देश चलायेगा, खुद कमायेगे, सब मिलकर खायेगे । पूंजीवादी समाज कहता है कि जो हमारे पास काम करेंगे, उसको हम वेतन देगे, बाकी जो हम धन कमायेगे, वो हमारा है ।
वर्गीय समझ को समझने के लिए इतने उदाहरण काफ़ी है, जिसमें ये साफ हो जाता है कि समाज में दो वर्ग है, दो विचारधारा है, दो तरीके की व्यवस्थाऐ है । सब कुछ दो वर्ग में बटा है ।
आज हमने इतना समझ लिया कि ये पूरी दुनिया, दो वर्गीय समाज है । दोनों वर्ग अपने अपने हितों को कायम रखने के लिये, दूसरे को कमजोर करने, और अपने वश में रखने की अनगिनत प्रयास सदियों से करते आये हैं, आगे भी होगें । इसलिए यह सुनिश्चित है कि वर्ग संघर्ष कभी खत्म नही होगा, कमजोर हो सकता है 

Thursday, September 20, 2018

अपने आसपास नजर घुमाइये कोई भी धर्म कहीं खतरे में नहीं है

अपने आसपास नजर घुमाइये
कोई भी धर्म कहीं खतरे में नहीं है

हमारे खेत जंगल नदी पर्यावरण पारिस्थितिकी तंत्र सामाजिक विचार भयंकर खतरे में हैं
हमारे गाँव ढाणी शहर के स्कूल हॉस्पिटल कॉलेज सरकारी संस्थाएं तंत्र भयंकर खतरे में हैं

बचाना है तो खेतों को जंगलों को बचाइए
नदियों को पारिस्थितिकी तंत्र को बचाइए
स्कूल कॉलेज हॉस्पिटलों सरकारी तंत्र को बचाइये

हमारा जीवनस्तर किसी भी धर्म को बचाने से नहीं सुधरेगा
हमारा जीवनस्तर का सीधा सम्बन्ध शिक्षा स्वास्थ्य रोजगार खेती पर्यावरण से जुड़ा हुआ है

किसी हिन्दू को जगाने की जरूरत नहीं और न हीं किसी मुसलमान को जगाने की जरूरत है

अपने आसपास के युवाओं को जगाएं
उन्हें खुद के लिये बेहतर शिक्षा प्राप्त करने के लिए जगाएं
उन्हें बेहतर केरियर बनाने के लिए जगाएं
उन्हें अपने आसपास के स्कूल कॉलेज हॉस्पिटल को बेहतर बनाने के लिए जगाइये

धर्म को बचाने या हिन्दू मुसलमान को जगाने बचाने के चक्कर में कहीं ऐसा न हो जाये
कि आपके खेत जंगल नदियां पर्यावरण मूलभूत अधिकार शिक्षा स्वास्थ्य भोजन के लिए काम करने वाली संस्थाएं ही खत्म हो जाएं

रही बात धर्म बचाने की तो धर्म प्रकृति NATURE से चलता है अगर पता नही पता करलो

इसलिए समझें और इन फितूरबाजियों को नजरअंदाज कीजिये

ठीक लगे तो शेयर कर सकते हैं या कॉपी करके भटकते दिखने वालों को फॉरवर्ड करके समझाने का प्रयास कर सकते हैं...यह हमारी जिम्मेदारी है।
                     ✒- Kushal Singh Rawat 🙏

Sunday, September 16, 2018

भारतीय लड़ाकू विमान तेजस का पहली बार हवा में ईंधन भरने का परीक्षण

खास बातें

  1. जमीन से बीस हजार फुट की ऊंचाई पर भरा गया ईंधन
  2. वायुसेना के ईंधन भरने वाले टैंकर ने तेजस में डाला 1900 किलो ईंधन
  3. ग्वालियर में स्टेशन से एचएएल और एडीए के अधिकारियों ने मानकों पर रखी नजर
नई दिल्ली: देश में निर्मित हल्के लड़ाकू विमान तेजस में पहली बार सफलतापूर्वक हवा में उड़ान के दौरान ईंधन भरा गया. इस तरह भारत उन देशों के विशिष्ट समूह में शामिल हो गया है जिसके पास सैन्य विमानों के लिए हवा में उड़ान के दौरान ईंधन भरने की प्रणाली है.

हिन्दुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) ने यह जानकारी दी है. हल्के लड़ाकू विमान विकसित करने वाली एचएएल की एक विज्ञप्ति में बताया गया है कि सुबह साढ़े नौ बजे यह सफलता मिली. उस दौरान बीस हजार फुट की ऊंचाई पर वायु सेना के आईएल78 के ईंधन भरने वाले टैंकर से तेजस एलएसपी8 में 1900 किलोग्राम ईंधन भरा गया.

यह भी पढ़ें : भारतीय लड़ाकू विमान तेजस का पहली बार हवा में ईंधन भरने का परीक्षण



कुछ दिन पहले वायु सेना ने रूस निर्मित आईएल-78 एमकेआई टैंकर का इस्तेमाल करते हुए हवा में ईंधन भरने का सफल परीक्षण किया था. विज्ञप्ति में कहा गया कि वायु सेना के आईएल78 से हवा में 1900 किलोग्राम ईंधन हल्के लड़ाकू विमान (तेजस एलएसपी8) में सफलतापूर्वक भरा गया. ग्वालियर में स्टेशन से एचएएल और एरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (एडीए) के अधिकारी सभी मानकों पर करीबी नजर रखे हुए थे.

दूसरा सत्र : निधि कुलपति के साथ सुष्मिता देव, जयंत चौधरी, राघव चड्डा, राघव अवस्थी और अंकीव बसोयम

दूसरा सत्र :  निधि कुलपति के साथ सुष्मिता देव, जयंत चौधरी, राघव चड्डा, राघव अवस्थी और अंकीव बसोयम

- बीजेपी लोगों को किसी भी मूवमेंट को डायवर्ट कर सकती है. मीडिया में गलत प्रचार किया गया. यह आरोप लगाया गया कि कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने इसलिए गठबंधन किया क्‍योंकि वह मुसलमानों के वोट लेना चाहते थे. इसके बाद मैंने अपनी विधानसभाओं में प्रचार करके लोगों को समझाया. इसका परिणाम था कि प्रधानमंत्री को अपनी विधानसभाओं को बचाने के लिए तीन दिन बनारस में रूकना पड़ा था. 
- बीजेपी इस बार देश की राजनीति से बाहर होगी. कांग्रेस ने हमें सीबीआई क्‍लब में डाला था और हमें इसका अनुभव है. हमारे तो सभी कामों की जांच हुई है.

- चुनाव आयोग प्रधानमंत्री को रोड शो नहीं रोकता है. चुनाव आयोग में जो भी जाता है राजनीति के जरिए से जाता है. बीजेपी के लोग कहते हैं गंगा साफ करेंगे लेकिन उनकी नियत ही साफ नहीं है: अखिलेश यादव

- अखिलेश यादव ने कहा कि उपचुनाव में हम सभी कह रह थे कि मुस्लिम को मत लडवाए लेकिन हमने ऐसा किया और मुस्लिम महिला पहली बार जीत कर आई. उन्‍होंने कहा कि बीजेपी की सच्‍चाई सब जान गए हैं.

- अखिलेश यादव ने कहा, जब बड़े काम होंगे तो नौकरियां मिलेंगी. वक्‍त आ गया है कि नौजवान नौकरी मांग रहा है. कोई भी समस्‍या एक दिन में ठीक नहीं हो सकती है. हमें इस मामले में अमेरिका से सीखना चाहिए.

- अखिलेश यादव ने कहा कि हम नेता चुनाव के बाद बनाएंगे, जब भी गठबंधन होता है तो फैसला बाद में होता है्. उन्‍होंने कहा कि हमारा मकसद बीजेपी को रोकना है. हमारा एजेंडा देश को बचाना है.

 - अखिलेश यादव ने कहा कि समाजवादी पार्टी किसी के साथ अन्‍याय होगा तो उसके साथ होगी

- उमर खालिद, चंद्रशेखर रावण पर अखिलेश यादव ने कहा कि जो समाजवादी पार्टी में आना चाहता है तो उसका स्‍वागत है.

- अखिलेश यादव ने कहा कि मीडिया का चरित्र बदला है और गठबंधन में पीछे जाने को तैयार है. BJP को हराना हमारा मक़सद है और मीडिया में मेरे ख़िलाफ़ दुष्प्रचार हुआ है. मैंने हार से सबक लिया है.

- अखिलेश यादव ने कहा कि जनता दुखी और नाराज़ है और जनता के ग़ुस्से ने हमारी मदद की. उन्‍होंने कहा कि EVM की जगह बैलेट से चुनाव होना चाहिए. उन्‍होंने कहा कि BJP से ज़्यादा लड़ाई RSS से है क्‍योंकि वह दिखाई नहीं देती है.

- अखिलेश यादव ने कहा कि यूपी में RSS ने किया झूठा प्रचार किया और RSS से देश को बचाना ज़रूरी है. उन्‍होंने कहा कि RSS ने 70 साल तिरंगा नहीं लगाया और उन्‍हें पिछड़ा बनाने के लिए RSS का शुक्रिया अदा करता हूं. उन्‍होंने कहा कि RSS जाति-धर्म में खाई बनाती है.

- केवल हमारी पार्टी नहीं, बल्कि देश को बचाने के लिए आरएसएस से दूर रहना होगा और देश को आरएसएस से बचाना होगा.

- बीजेपी ने एहसास दिलाया कि वह बैकवर्ड है

-समाजवादी पार्टी के लोग इसलिए हारी तो RSS ने लोगों को गुमराह किया

- मेरी लड़ाई बीजेपी है लेकिन दिखाई ना देने वाली RSS से भी लड़ाई है.

- अखिलेश यादव ने कहा, 50 साल तो बहुत लंबा समय है सरकार 50 हफ्ते में फैसला लेगी

NDTV YUVA Conclave 2018 LIVE Updates:


- डूसू अध्‍यक्ष अंकित: मैं एबीवीपी का धन्यवाद करता हूं. एबीवीपी हमें एक्टिविज्म सिखाता है. मैं अपना भविष्य राजनीति में देखता हूं. युवा को पता है कि देश को किस तरह संभालना है. युवा देश का जड़ है. अगर आप स्टूडेंट एक्टिवस्ट हैं तो पढ़ाई से ज्यादा फर्क नहीं पड़ता. 

- सुष्मिता देव (कांग्रेस) : अगर आज हमसे कोई पूछे कि आपका पेशा क्या है तो मैं कहूंगा वकालत. ये बात सही है कि राजनीति में आने के बाद मुझे वकालत करने का समय नहीं मिलता. राजनीति में लोगों की समस्या से आपका वक्त जुड़ा है. अगर आपकी जरूरत एक जनप्रतिनिधि के हिसाब से आपकी जरूरत रात के बारह बजे है तो आपको उस वक्त भी जाना होगा. राजनीति को कभी भी पेश की तरह देखेंगे तो उसमें डाउन फॉल आएगा. अगर आप ये सोचेंगे कि  राजनीति से अगर आपको भोजन मिल जाएगा तो आप किसी भी हद तक जा सकते हैं. 

- जयंत चौधरी (आरएलडी): हमें युवाओं में नैतिक तंत्र विकसित कनरे की जरूरत है.

- जयंत चौधरी (आरएलडी) : सोशल मीडिया में ट्विटर पर एक फौज खड़ी हो गई है. बहुत से लोग इसका सही इस्तेमाल करते हैं तो कोई गलत. पहले वायरल शब्द बुखार होता था, मगर आज हर युवा बोलता है वायरल होना. समय बदल रहा है. 

- सवाल: क्या सरकार का रिमोट कंट्रोल नागपुर में है?
अवस्थी: संघ का काम को-ऑर्डिनेशन का होता है. संघ का काम सिर्फ अनुशांगिक संगठनों में सामंजस्य का काम करता है. संघ सरकार में दखल नहीं, बल्कि सबके बीच सहयोग का काम करता है. 

- जयंत: पश्चिमी उत्तर प्रदेश के परिणाम से उम्मीद जगी. आदमी हारने से ज्यादा सीखता है. कैराना की जीत से हमने यह साबित किया कि यहां के लोग सांप्रदायिक नहीं हैं. 

- हाथरस में दलित के बारात मामले पर जयंत ने कहा कि यह बहुत बड़ा कलंक है. वहां के स्थानीय प्रशासन ने हाईकोर्ट में जाकर दलील दी कि हम सुरक्षा नहीं दे सकते. हालांकि, बुनियादी ढांचा बदल रहा है, मगर अभी भी चीजें मौजूद हैं. मुहल्ला का मुहल्ला अभी भी बंटा हुआ है. 

- राजस्थान में शंभू लाल रैगर के मामले पर आरएसएस के अवस्थी ने कहा कि मुझे नहीं लगता कि 2014 में ऐसी हिम्मत ज्यादा हुई है या नहीं. इससे पहले भी मैंने देखा है. मुझे लगता है कि मोदी की सत्ता आने के बाद मीडिया को दलित और इस तरह के मुद्दे ज्यादा दिखने लगे हैं. 

- सुष्मिता ने कहा कि जब कोई मंदिर में जाता है तो वहां के लोगों का डिमांड होता है. ऐसा नहीं है कि हम ये तय करते हैं. राहुल गांधी की यह नीति नहीं कि मैं यहां जाऊंगा यहां नहीं. हां, बस चर्चा जरूर होती है. लोगों की डिमांड पर ही कोई मंदिर में जाता है. 


- जयंत चौधरी ने कहा कि बेरोज़गारी से ग़ुस्सा और दुनिया से जुड़ा गांव का युवा है. देश-दुनिया को लेकर जागरुक है. 

- आरएसएस के राघव अवस्थी: भारतीय जनता पार्टी वंशवाद से पूरी तरह मुक्त नहीं है, मगर कांग्रेस इसमें पूरी तरह लिप्त है. शाखाओं में युवाओं की संख्या बढ़ती जा रही है. युवा संघ के साथ शुरू से है, मगर मीडिया को अभी दिखा है. 

- आरएसएस के राघव अवस्थी: आरएसएस का प्रचार प्रसार पहले भी हो रहा था. मगर जब नरेंद्र मोदी जब सत्ता में आए हैं, तब से लोगों की दिलचस्पी बढ़ी है. 2014 के बाद पीएम मोदी की वजह से आरएसएस की शाखा में जाने वाले युवाओं की संख्या बढ़ी है. वंशवाद की राजनीति करने वालों को उखाड़ फेंकने का जज्बा आज युवाओं में हैं. 

- आम आदमी पार्टी के राघव चड्डा: आम आदमी पार्टी अभी दिल्ली में सरकार चला रही है. दिल्ली में गांव देहात के साथ शहर भी है. दिल्ली में ज्यादा इलाका शहर का पड़ता है इसलिए शहरी युवा आम आदमी पार्टी से ज्यादा जुड़ा और आकर्षित हुआ. गांव के युवा भी हमारी पार्टी से जुड़े हुए हैं. आज ये युवा जाति धर्म के डमरू पर नहीं जाते हैं. वे अब सवाल पूछते हैं. अब वे हमसे भी सवाल पूछते हैं. पहले से ज्यादा युवा पॉलिटिकली अवेयर है. आज युवा को पता है कि कौन नेता वादा पूरा करेगा या नहीं. 

- आम आदमी पार्टी के नेता राघव चड्ढा ने कहा कि आज का युवा यह जानता है कि नेता क्‍या वादे कर रहा है

- जयंत चौधरी: समाज में अब एक बदलाव आया है. गांव में पहले फैसला लेने वाले पुराने लोग होते थे. अब समाज और घर के फैसले युवाओं के हाथों में आ गये हैं, क्योंकि अब वह शहरों में कमाने लगे हैं. पहले खेतों में कमाने वाले बुजुर्ग लेते थे. 

- कांग्रेस की सुष्मिता देव: वादे, धोषणा पत्र एक मुद्दा होता है और प्रदर्शन अलग मुद्दा होता है. महिलाएं और युवा जिस तरफ झुकेंगे सरकार उन्हीं की बनेगी. 

Friday, August 31, 2018

टूटे ट्रैक का खुद पता लगाएगी ट्रेन, भारत में पहली बार इस तकनीक का इस्तेमाल

टूटे ट्रैक का खुद पता लगाएगी ट्रेन, भारत  में पहली बार इस तकनीक का इस्तेमाल...

भारत में पहली बार अधिकारियों ने रेल दुर्घटनाएं रोकने के लिए मुम्बई और अहमदाबाद को जोड़ने वाली 508 किलोमीटर लंबी बुलेट ट्रेन परियोजना के मार्गों में किसी भी प्रकार की दरार का पता लगाने वाली स्वचालित प्रणाली लगाने का फैसला किया है। बुलेट ट्रेनें आग का पता लगाने वाली उन्नत प्रणाली और डिब्बों को पटरी से उतरने से रोकने वाले उपायों से लैस होंगी तथा भूकंपजनित घटनाओं से भी पूरे बुलेट ट्रेन ढांचे को सुरक्षा मिलेगी।

बुलेट ट्रेन परियोजना का क्रियान्वयन करने वाली एजेंसी नेशनल हाईस्पीड रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड के अधिकारियों ने कहा कि यह प्रणाली सुरक्षा उपायों में एक अहम पहलू होगी। उन्होंने कहा कि वर्तमान रेल नेटवर्क में अब तक यह प्रौद्योगिकी नहीं अपनाई गई है। लेकिन 320 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार तक जाने वाली इन ट्रेनों में ऐसी प्रौद्योगिकी का उपयोग अहम हो जाता है।

कॉरपोरेशन की रिपोर्ट में कहा गया है, ‘यह प्रणाली रेलमार्गों में विद्युत नियंत्रण परिपथ का इस्तेमाल करेगी। नियंत्रण परिपथ में त्रुटि आने पर मार्ग में दरार की पहचान करने में मदद मिलेगी। इस प्रौद्योगिकी से रेलवे ट्रैक पर दरारों का पता लगाने के लिए नियमित निरीक्षण के दौरान लगने वाला काफी वक्त बचेगा। प्रति किलोमीटर इस प्रणाली पर क्या लागत आएगी, इसका आकलन किया जा रहा है लेकिन इस प्रौद्योगिकी को लगाने का फैसला पहले ही चुका है।

यहां पढ़ें पूरी खबर- http://v.duta.us/npUp7AAA

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Thursday, August 30, 2018

मैं शिक्षा को लेकर बहुत दुविधा में हूँ..

एक स्कूल का प्रिंसिपल जो जर्मनी में हिटलर के नाज़ी कैम्प से किसी तरह बच निकला था उसने लिखा है कि:
"मैं हिटलर के मृत्यु दंड वाले कैम्प से बच निकला था.. और मेरी आँखों ने वहाँ जो देखा था, मैं चाहता हूँ कि उसे दुनिया मे और कोई कभी न देखे..
उन कैम्प में मौत वाले गैस चैम्बरों को क़ाबिल इंजीनियरों द्वारा बनाया गया था.. क़ाबिल और कुशल डॉक्टर बच्चों को ज़हर देते थे.. प्रशिक्षित नर्सें नवजात बच्चों को जान से मारती थीं.. औरतें और बच्चों को कॉलेज से पढ़े हुवे ग्रेजुएट और डिग्री धारक गोली से मारते थे...
इसलिए ये सब देखने के बाद अब मैं शिक्षा को लेकर बहुत दुविधा में हूँ.. और मैं आप सब से विनती करता हूँ कि अपने विद्यार्थियों और बच्चों की मदद कीजिये इंसान बनने में.. और ध्यान दीजिए कि आपकी शिक्षा कहीं उन्हें प्रबुद्ध राक्षस, कुशल मनोरोगी और क़ाबिल पागल तो नहीं बना रही है?
पढ़ना, लिखना, भाषा, इतिहास, गणित तभी तक ज़रूरी है जब तक वो हमारे विद्यार्थियों में मानव मूल्य और इंसानियत का विकास करें.. अगर ये नहीं होता है तो सारी पढ़ाई बेकार है"
उपरोक्त कथन हर जाति, धर्म, वर्ग पर लागू हो रहा है आज के दौर में... इसलिए ध्यान से देखिये जो लोग आपको नफ़रत भरे मैसेज भेजते हैं व्हाट्सएप्प पर.. वो सब पढ़े लिखे, डॉक्टर, इंजीनियर और बड़े बड़े ओहदों पर काम करने वाले लोग हैं.. आपके आसपास के लोग इस समय प्रबुद्ध राक्षस, कुशल मनोरोगी और क़ाबिल पागल बन चुके हैं.. जब भी ऐसा मैसेज आपका कोई अपना भेजे तो उसे चेताईये.. आप उन मैसेज का कोई रिप्लाई नहीं करते हैं तो भेजने वाला जगता नहीं है और जब वो जागेगा नहीं तो उसे शर्म भी नहीं आएगी.. इसलिए रिप्लाई कीजिये ऐसे मैसेज का और उन्हें बोलिये कि वो आपको अपने जैसा "मनोरोगी" न बनाएं
पढ़े लिखे लोगों को उनकी मूर्छा से बाहर खींचिए।
🙏🙏🙏🙏🙏🙏