- डूसू अध्यक्ष अंकित: मैं एबीवीपी का धन्यवाद करता हूं. एबीवीपी हमें एक्टिविज्म सिखाता है. मैं अपना भविष्य राजनीति में देखता हूं. युवा को पता है कि देश को किस तरह संभालना है. युवा देश का जड़ है. अगर आप स्टूडेंट एक्टिवस्ट हैं तो पढ़ाई से ज्यादा फर्क नहीं पड़ता.
- सुष्मिता देव (कांग्रेस) : अगर आज हमसे कोई पूछे कि आपका पेशा क्या है तो मैं कहूंगा वकालत. ये बात सही है कि राजनीति में आने के बाद मुझे वकालत करने का समय नहीं मिलता. राजनीति में लोगों की समस्या से आपका वक्त जुड़ा है. अगर आपकी जरूरत एक जनप्रतिनिधि के हिसाब से आपकी जरूरत रात के बारह बजे है तो आपको उस वक्त भी जाना होगा. राजनीति को कभी भी पेश की तरह देखेंगे तो उसमें डाउन फॉल आएगा. अगर आप ये सोचेंगे कि राजनीति से अगर आपको भोजन मिल जाएगा तो आप किसी भी हद तक जा सकते हैं.
- जयंत चौधरी (आरएलडी): हमें युवाओं में नैतिक तंत्र विकसित कनरे की जरूरत है.
- जयंत चौधरी (आरएलडी) : सोशल मीडिया में ट्विटर पर एक फौज खड़ी हो गई है. बहुत से लोग इसका सही इस्तेमाल करते हैं तो कोई गलत. पहले वायरल शब्द बुखार होता था, मगर आज हर युवा बोलता है वायरल होना. समय बदल रहा है.
- सवाल: क्या सरकार का रिमोट कंट्रोल नागपुर में है?
अवस्थी: संघ का काम को-ऑर्डिनेशन का होता है. संघ का काम सिर्फ अनुशांगिक संगठनों में सामंजस्य का काम करता है. संघ सरकार में दखल नहीं, बल्कि सबके बीच सहयोग का काम करता है.
- जयंत: पश्चिमी उत्तर प्रदेश के परिणाम से उम्मीद जगी. आदमी हारने से ज्यादा सीखता है. कैराना की जीत से हमने यह साबित किया कि यहां के लोग सांप्रदायिक नहीं हैं.
- हाथरस में दलित के बारात मामले पर जयंत ने कहा कि यह बहुत बड़ा कलंक है. वहां के स्थानीय प्रशासन ने हाईकोर्ट में जाकर दलील दी कि हम सुरक्षा नहीं दे सकते. हालांकि, बुनियादी ढांचा बदल रहा है, मगर अभी भी चीजें मौजूद हैं. मुहल्ला का मुहल्ला अभी भी बंटा हुआ है.
- राजस्थान में शंभू लाल रैगर के मामले पर आरएसएस के अवस्थी ने कहा कि मुझे नहीं लगता कि 2014 में ऐसी हिम्मत ज्यादा हुई है या नहीं. इससे पहले भी मैंने देखा है. मुझे लगता है कि मोदी की सत्ता आने के बाद मीडिया को दलित और इस तरह के मुद्दे ज्यादा दिखने लगे हैं.
- सुष्मिता ने कहा कि जब कोई मंदिर में जाता है तो वहां के लोगों का डिमांड होता है. ऐसा नहीं है कि हम ये तय करते हैं. राहुल गांधी की यह नीति नहीं कि मैं यहां जाऊंगा यहां नहीं. हां, बस चर्चा जरूर होती है. लोगों की डिमांड पर ही कोई मंदिर में जाता है.
- जयंत चौधरी ने कहा कि बेरोज़गारी से ग़ुस्सा और दुनिया से जुड़ा गांव का युवा है. देश-दुनिया को लेकर जागरुक है.
- आरएसएस के राघव अवस्थी: भारतीय जनता पार्टी वंशवाद से पूरी तरह मुक्त नहीं है, मगर कांग्रेस इसमें पूरी तरह लिप्त है. शाखाओं में युवाओं की संख्या बढ़ती जा रही है. युवा संघ के साथ शुरू से है, मगर मीडिया को अभी दिखा है.
- आरएसएस के राघव अवस्थी: आरएसएस का प्रचार प्रसार पहले भी हो रहा था. मगर जब नरेंद्र मोदी जब सत्ता में आए हैं, तब से लोगों की दिलचस्पी बढ़ी है. 2014 के बाद पीएम मोदी की वजह से आरएसएस की शाखा में जाने वाले युवाओं की संख्या बढ़ी है. वंशवाद की राजनीति करने वालों को उखाड़ फेंकने का जज्बा आज युवाओं में हैं.
- आम आदमी पार्टी के राघव चड्डा: आम आदमी पार्टी अभी दिल्ली में सरकार चला रही है. दिल्ली में गांव देहात के साथ शहर भी है. दिल्ली में ज्यादा इलाका शहर का पड़ता है इसलिए शहरी युवा आम आदमी पार्टी से ज्यादा जुड़ा और आकर्षित हुआ. गांव के युवा भी हमारी पार्टी से जुड़े हुए हैं. आज ये युवा जाति धर्म के डमरू पर नहीं जाते हैं. वे अब सवाल पूछते हैं. अब वे हमसे भी सवाल पूछते हैं. पहले से ज्यादा युवा पॉलिटिकली अवेयर है. आज युवा को पता है कि कौन नेता वादा पूरा करेगा या नहीं.
- आम आदमी पार्टी के नेता राघव चड्ढा ने कहा कि आज का युवा यह जानता है कि नेता क्या वादे कर रहा है
- जयंत चौधरी: समाज में अब एक बदलाव आया है. गांव में पहले फैसला लेने वाले पुराने लोग होते थे. अब समाज और घर के फैसले युवाओं के हाथों में आ गये हैं, क्योंकि अब वह शहरों में कमाने लगे हैं. पहले खेतों में कमाने वाले बुजुर्ग लेते थे.
- कांग्रेस की सुष्मिता देव: वादे, धोषणा पत्र एक मुद्दा होता है और प्रदर्शन अलग मुद्दा होता है. महिलाएं और युवा जिस तरफ झुकेंगे सरकार उन्हीं की बनेगी.
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