Saturday, January 26, 2019

आपका दिमाग

1.जब आप जाग रहे होते है तब आपका दिमाग 10 से
23 वाट तक की बिजली उर्जा छोड़ता है
जो कि एक बिजली के बल्ब
को भी चला सकती है.
2. मनुष्य के दिमाग में दर्द की कोई भी नस
नही होती इसलिए वह कोई दर्द नही महसूस
नही करता.
3. हमारा दिमाग 75% से ज्यादा पानी से बना होता है.
4. आपका दिमाग 5 साल की उम्र तक 95% बढ़ता है
और 18 तक पहुँचते-पहुँचते 100% विकसित
हो जाता है ओर उसके बाद बढ़ना रूक जाता है.
5. एक गर्भवती महिला के दिमाग के न्युरॉनज़
की गिणती 2,50,000 न्युरॅान प्रति मिनट के
हिसाब से बढ़ती है.
6. आप अपने दिमाग में न्युरॉनज़
की गिणती दिमागी क्रियाएँ करके बढ़ा सकते हैं
क्योंकि शरीर के जिस भी भाग की हम
ज्यादा उपयोग करते है वह और विकसित
होता जाता है.
7. पढ़ने और बोलने से एक बच्चो का दिमागी विकास
ज्यादा होता है.
8. जब आप एक आदमी का चेहरा गौर से देखते है
तो आप अपने दिमाग का दायां भाग उपयोग करते है.
9. हमारे शरीर के भिन्न हिस्सों से सुचना भिन्न
रफतार से और भिन्न न्युरॉन के द्वारा हमारे
दिमाग तक पहुँचती है. सारे न्युरॅान एक जैसे
नही होते कई ऐसे न्युरॅान भी होते है
जो सुचना को0.5 मीटर प्रति सैकेंड की रफतार से
दिमाग तक पहुँचाते है और कई ऐसे भी होते है जो सुचना को 120 मीटर प्रति सैकेंड की रफतार
से दिमाग तक पहुँचाते है.
10. आपके दिमाग की Right side आपकी body के left
side को जबकि दिमाग की left side
आपकी body के Right side को कंट्रोल करती है.
11. जो बच्चे पाँच साल का होने से पहले दो भाषाएँ
सीखते है उनके दिमाग की संरचना थोड़ी सी बदल
जाती है.
12. आप के दिमाग में हर दिन औसतन 60,000
विचार आते हैं.
13. अकसर ऐसा कहा जाता है कि हम दिन में 20,000
बार पल्क झपकते है और इसके कारण हम दिन में 30
मिनट तक अंन्धे रहते हैं. पर असल में हम दिन में
20,000 बार पलक जरूर झपकते है पर 30 मिनट तक
अन्धे नही रहते. क्योंकि हमारा दिमाग इतने कम
समय में वस्तु का चित्र अपने आप बनाए रखता है. हमारे पलक झपकने का समय 1 सैकेंड के 16वे हिस्से
से कम होता है पर दिमाग किसी भी वस्तु
का चित्र सैकेंड के 16वे तक बनाए रखता है.
14. हँसते समय हमारे दिमाग के लगभग 5 हिस्से एक
साथ कार्य करते हैं.
15. दिमाग का आकार और वजन दिमागी शक्ती पर
कोई प्रभाव नही डालता . Albert Einstein के दिमाग का वजन 1230 ग्राम था जो कि सामान्य
मनुष्य से कहीं कम था.
16. एक जिन्दा दिमाग बहुत नर्म होता है और इसे
चाकु से आसानी से काटा जा सकता है.
17. दिमाग में 1,00,000 मील लंम्बी रक्त वाहिकाएँ
होती हैं.
18. दिमाग को 4 से 6 मिनट तक ऑक्सीजन न
मिलने पर भी यह रह सकता है पर 5 मे 10 मिनट
तक न मिलने पर brain damage पक्की है.
19. मनुष्य का दिमाग का वजन लगभग 1500 ग्राम तक
होता है.
20. हमारे दिमाग में न्युरॅान की गिणती 100 अरब
( जितने आकाशगंगा में तारे होते है) होते हैं और हर
न्युरॅान में 1,000 से 10,000 synopses होते है.
21. दिमाग का सतही क्षेत्रफल लगभग 1,500 से
3,000 वर्ग सैटीमीटर तक होता है.
22. वैज्ञानिक मानते हैं कि ब्रह्माण्ड में सबसे
जटिल और रहस्मई चीज मनुष्य का दिमाग है.
23. हैलमेट पहनकर दिमाग को चोट लगने
की संम्भावना फिर भी 80% रहती ही है.
24. मानव दिमाग के अंदर एक सैकेंड में 1 लाख
रसायनिक प्रतिक्रियायें होती हैं.
25. दिमाग शरीर का सबसे ज्यादा चर्बी वाला अंग है.
26. मस्तिष्क में प्रत्येक वस्तु (सूचना) संग्रहित
होते जाता है – तकनीकी रूप से मस्तिष्क के पास
अनुभव, अवलोकन, पठन, श्रवण आदि प्रत्येक
वस्तु (सूचना) को संग्रह करने की क्षमता होती है।
जन्म के बाद से प्रत्येक वस्तु उसमें संग्रहित होते
जाती है, कुछ भी नहीं छूटता। यह अलग बात है कि मनुष्य में अपने ही मस्तिष्क में सग्रहित
किसी अनेक वस्तुओं (सूचनाओं) तक वापस पहुँचने
याने कि अनेक घटनाओं को स्मरण रख पाने
की क्षमता नहीं होती।
27. दिमाग शरीर का लगभग 2% है परन्तु यह कुल
ऑक्सीजन का 20% खपत करता है और खून
भी 20% उपयोग करता हैं.
28. जब मनुष्य दो साल का होता है तो उसके दिमाग में
किसी और समय के इलावा Brains cells
की गिणती सबसे ज्यादा होती है.
29. दिमाग के बारे में सबसे पहला उल्लेख 6000 साल
पहले सुमेर से मिलता है.
30. सोधो से पता चला है कि पुरूषों और महिलायों के
दिमाग की संरचना भिन्न होती है.
31. अगर हमारी चमड़ी और मेहदे की तरह हमारे दिमाग
के cell भी बदल जाए तो हम अपनी याददाशत
गवा सकते हैं.
32. मनुष्य के दिमाग की left side बोलने को कंटरोल
करती है और पंक्षियों के दिमाग की left side
उनकी चहचहाना कंटरोल करती है.
33. मनुष्य दिन की अपेक्षा रात को ज्यादा बढ़ते हैं. यह
दिमाग के एक छोटे से भाग pituiary ग्रंथी के कारण
होती है जो रात को सोते समय एक बढ़ने
वाला हारमोन छोड़ती है.

Sunday, January 13, 2019

गणित में सांख्यिकी(Statistics) एक अजीब विषय है!



बीहड़न में तो बाग़ी होत हैं, डकैत मिलते हैं पार्लियामेंट में- 'पान सिंह तोमर' फिल्म का अंश

गणित में सांख्यिकी(Statistics) एक अजीब विषय है! अजीब इसलिए है कि यह न्यूनतम को अधिकतम वाली फीलिंग देता है और अधिकतम को न्यूनतम वाली! मसलन, यदि 10 लोगों के समूह में,

5 लोगों की आय 10000रूपये/प्रति माह है!
3 लोगों की आय 5000रूपये प्रति माह है!
.... और 2 लोग बेरोजगार हैं!

सांख्यिकीय गणना के अनुसार, पूरे समूह की आय- 65000रूपये प्रतिमाह हुई! और प्रति व्यक्ति आय हुई-6500रूपये प्रतिमाह!

मतलब, जो दो लोग बेरोजगार थे, सांख्यिकी ने उनको भी रोजगार मुहैया करवा दिया!

इनसे इतर एक और सांख्यिकी है! वह थोड़ी सामाजिक है! इसके मुताबिक, किसी समूह में मौजूद सदस्यों की औकात और ओहदे, उस समूह की योग्यता तथा भव्यता बयान करते हैं! समूह यदि गणमान्यों का है तो बैठक के बाद समाज का हित निकलकर बाहर आएगा! वही दूसरी तरफ यदि समूह चोरों का है तो बैठक की समाप्ति के बाद सेंधमारी की घटनाएं बाहर आएंगी!

2014 के लोकसभा चुनाव ने यूँ तो ढेरों कीर्तिमान अपने नाम किये थे! सबसे गंभीर और दुर्भाग्यपूर्ण कीर्तिमान चुनाव बाद सामने आया!

चुनाव बाद हुए सर्वे में प्रतिनिधियों के दिए एफिडेविट से पता चला, भारत की संसद में 82% करोड़पति घुस चुके हैं! अकेले लोअर हॉउस(लोकसभा) के 541 सदस्यों में 442 सदस्य ऐसे हैं जिनकी चल अचल संपत्ति करोड़ों में या उससे ऊपर है! 15 सांसद ऐसे हैं जो अरबपति हैं! इनमे सबसे ज्यादा सदस्य आंध्र प्रदेश से हैं! इसीलिए भारतीय राजनीति के इतिहास में वर्तमान(16 वीं) संसद को "धनवानों" की सभा कहा जाता है! वही अपर हाउस(राज्यसभा) में इनकी तादाद 90% है! कुल 233 सदस्यों में से 205 सदस्य करोड़पति हैं!

जैसा कि मैंने ऊपर बताया.......परिणाम, समूह के सदस्यों की औकात तथा ओहदे पर निर्भर करते हैं! कुछ ऐसा ही परिणाम भारत के इस घर में हुई बैठकों से बाहर निकलता है!

इस घर के दोनों फ्लोर के सारे करोड़पति तथा अरबपति मिलकर गरीबों के उत्थान के लिए आवाज उठाते हैं! उनके लिए योजनाएं बनाते हैं! खुद की आय अधिकतम है, लेकिन किसानों की फसल का न्यूनतम समर्थन मूल्य यही लोग तय करते हैं! सैनिकों से लेकर अफसरों और तमाम कर्मचारियों के साथ साथ मजदूरों की दिहाड़ी भी यही लोग तय करते हैं!

ये भले लोग कुछ सामाजिक कार्य भी करते हैं! खुद के विरोध में उठी हर आवाज का नामकरण भी यही करते हैं! वनों जंगलों में रहने वाले जिले भर के लोगों को नक्सली घोषित कर देते हैं क्युकी उस जिले के लोगों ने इन्हे अपनी जमीनें देने से मना कर दिया था! सैकड़ों किलोमीटर पैदल चलकर आये किसानों को वामपंथी घोषित कर देते हैं, क्युकी वे अपना हक मांग रहे थे! ख़राब खाने की शिकायत पर एक सैनिक को देशद्रोही घोषित कर देते हैं! सांप्रदायिक बयान के बाद भड़की हिंसा में मारे लोगों के लिए मुआवजे का एलान भी यही करते हैं! छात्रों, अध्यापकों, मजदूरों वगैरह पर लाठीचार्ज का फैसला भी इसी घर के लोग करते हैं!

समाज के लिए इतना सारा करते हैं तो खुद के भी कुछ न कुछ करते ही होंगे? बिलकुल करते हैं!

सरकारी कर्मचारियों का वेतन 10 साल में एक बार रिवाईस करते हैं, लेकिन खुद का वेतन हर पांच साल में बढ़ा लेते हैं! पिछले साल फ़रवरी में ही बढ़ाया है! बस,ट्रेन और हवाई जहाज में मुफ्त में सैर करते हैं!अनलिमिटेड कालिंग के ज़माने में हर महीने 15000रूपये टेलीफोन भत्ता के नाम पर लेते हैं! लोगों से सब्सिडी छोड़ने की अपील करते हैं, लेकिन खुद संसद की कैंटीन में सब्सिडी डकारते हैं! एक सैनिक,15 साल की नौकरी के बाद पेंशन का हकदार होता है, लेकिन ये सदन की पहली बैठक के बाद ही पेंशन के हकदार हो जाते हैं!

...... और तो और,खुद ही दोनों सदनों में हंगामा करते हैं और तमाशे का पैसा जनता से वसूल करते हैं!

तमाशा भी ऐसा वैसा नहीं है!
एक ऐसा तमाशा है जिसको देखने के लिए भारत की जनता, प्रति मिनट ढाई लाख रूपये भी देती है और जब इन महानुभावों पर हमला होता है तो यही जनता खुद के सीने पर गोली भी खाती है!

Via कपिल देव sir

Tuesday, January 1, 2019

बुद्धिमत्ता क्या है?

मेरी बुद्धिमत्ता की परिभाषा जरा अलग है। मैं बुद्धिमत्ता को तीन भागों में बांटती हूं।
बुद्धिमत्ता 《1》
आइए इसे समझें। एक इंसान गर्मी में रात को छत पर सोता है, मच्छरदानी लगा कर। अब मच्छरदानी में छेद है जिससे मच्छर उसे तंग करते हैं। आदमी बुद्धिमत्ता का प्रयोग करता है और मच्छरदानी की दूसरी और भी एक उतना ही छेद कर देता है और एक पतली सी पाइप आर पार कर देता है। अब मच्छर एक छेद से घुसते भी हैं तो मच्छरदानी के अंदर ना जाकर दूसरे सिरे से बाहर निकल आते हैं। आदमी चैन की नींद सोता है। हमें भी नकारात्मक विचारों, लोगों और भावों को इसी बुद्धिमत्ता के प्रयोग द्वारा अपने जीवन में घुसने से रोकना है। यह व्यवहारिक बुद्धिमत्ता है
बुद्धिमता 《2》
एक गाँव में एक बुद्धिमान व्यक्ति रहता था। उसके पास 19 ऊंट थे। एक दिन उसकी मृत्यु हो गयी। मृत्यु के पश्चात वसीयत पढ़ी गयी। जिसमें लिखा था कि:
मेरे 19 ऊंटों में से आधे मेरे बेटे को, उसका एक चौथाई मेरी बेटी को, और उसका पांचवाँ हिस्सा मेरे नौकर को दे दिए जाएँ।
सब लोग चक्कर में पड़ गए कि ये बँटवारा कैसे हो ?
19 ऊंटों का आधा अर्थात एक ऊँट काटना पड़ेगा, फिर तो ऊँट ही मर जायेगा। चलो एक को काट दिया तो बचे 18 उनका एक चौथाई साढ़े चार- साढ़े चार फिर??
सब बड़ी उलझन में थे। फिर पड़ोस के गांव से एक बुद्धिमान व्यक्ति को बुलाया गया
वह बुद्धिमान व्यक्ति अपने ऊँट पर चढ़ कर आया, समस्या सुनी, थोडा दिमाग लगाया, फिर बोला इन 19 ऊंटों में मेरा भी ऊँट मिलाकर बाँट दो।
सबने पहले तो सोचा कि एक वो पागल था, जो ऐसी वसीयत कर के चला गया, और अब ये दूसरा पागल आ गया जो बोलता है कि उनमें मेरा भी ऊँट मिलाकर बाँट दो। फिर भी सब ने सोचा बात मान लेने में क्या हर्ज है।
19+1=20 हुए।
20 का आधा 10 बेटे को दे दिए।
20 का चौथाई 5 बेटी को दे दिए
20 का पांचवाँ हिस्सा 4 नौकर को दे दिए।
10+5+4=19 बच गया एक ऊँट जो बुद्धिमान व्यक्ति का था वो उसे लेकर अपने गॉंव लौट गया।
सो हम सब के जीवन में 5 ज्ञानेंद्रियाँ, 5 कर्मेन्द्रियाँ, 5 प्राण, और 4 अंतःकरण चतुष्टय( मन,बुद्धि, चित्त, अहंकार) कुल 19 ऊँट होते हैं। सारा जीवन मनुष्य इन्हीं के बँटवारे में उलझा रहता है और
जब तक उसमें आत्मा रूपी ऊँट नहीं मिलाया जाता यानी के आध्यात्मिक जीवन (आध्यात्मिक बुद्धिमत्ता) नहीं जिया जाता, तब तक सुख, शांति, संतोष व आनंद की प्राप्ति नहीं हो सकती।
लेकिन हमारे जीवन का यह हाल है जो इस तस्वीर में दिख रहा है “ अजब गजब नजारा है इस दुनिया का, दोनों हाथों से सब कुछ बटोरने में लगे हैं, फिर खाली हाथ जाने के लिए” आध्यात्मिक बुद्धिमत्ता बताती है कि सारी जिंदगी जो इकट्ठा करते हैं वह अंत समय कचरा ही साबित होता है और इस बुद्धिमत्ता के अनुसार हमें शॉर्ट टर्म इन्वेस्टमेंट नहीं लोंग टर्म इन्वेस्टमेंट करनी है और वह है सत्कर्म, प्रभु स्मरण और पुण्य। सिर्फ वही बैग हमारे साथ दूसरी दुनिया में जा सकेगा।
बुद्धिमत्ता 《3》
मृत्यु के पश्चात जब स्थूल शरीर त्याग कर, सूक्ष्म और कारण शरीर के साथ धर्म राय के दरबार में अपराधी की तरह खड़े होते हैं, धर्मराज हमारे सारे अपराध एक-एक करके बोलता है। मानव इंकार करता है तो फिर वही ज्ञानेंद्रियां आंख , नाक, कान मुंह, त्वचा हमारे विरुद्ध गवाही देती हैं। हां! इस ने वह फलाना अपराध किया। एक एक ज्ञानेंद्री बोलती है, हमारे पास कोई चारा ही नहीं होता और हमारी सजा निश्चित होती जाती है। अब बुद्धिमता यह है कि इन ज्ञान इंद्रियों के द्वारा ऐसे कर्म ना हो जिनसे धर्म राय की अदालत में शर्मिंदा होना पड़े।
नया साल उनको ही मुबारक है, जो उपरोक्त सभी बुद्धिमत्ता को अपनाकर अपने जीवन को नई दिशा देते है और बेहतर बनाते हैं। बाकी हम सब के लिए तो सिर्फ तारीख बदली है और जिंदगी के कैलेंडर से 1 साल और कम हो गया है।