Sunday, January 13, 2019

गणित में सांख्यिकी(Statistics) एक अजीब विषय है!



बीहड़न में तो बाग़ी होत हैं, डकैत मिलते हैं पार्लियामेंट में- 'पान सिंह तोमर' फिल्म का अंश

गणित में सांख्यिकी(Statistics) एक अजीब विषय है! अजीब इसलिए है कि यह न्यूनतम को अधिकतम वाली फीलिंग देता है और अधिकतम को न्यूनतम वाली! मसलन, यदि 10 लोगों के समूह में,

5 लोगों की आय 10000रूपये/प्रति माह है!
3 लोगों की आय 5000रूपये प्रति माह है!
.... और 2 लोग बेरोजगार हैं!

सांख्यिकीय गणना के अनुसार, पूरे समूह की आय- 65000रूपये प्रतिमाह हुई! और प्रति व्यक्ति आय हुई-6500रूपये प्रतिमाह!

मतलब, जो दो लोग बेरोजगार थे, सांख्यिकी ने उनको भी रोजगार मुहैया करवा दिया!

इनसे इतर एक और सांख्यिकी है! वह थोड़ी सामाजिक है! इसके मुताबिक, किसी समूह में मौजूद सदस्यों की औकात और ओहदे, उस समूह की योग्यता तथा भव्यता बयान करते हैं! समूह यदि गणमान्यों का है तो बैठक के बाद समाज का हित निकलकर बाहर आएगा! वही दूसरी तरफ यदि समूह चोरों का है तो बैठक की समाप्ति के बाद सेंधमारी की घटनाएं बाहर आएंगी!

2014 के लोकसभा चुनाव ने यूँ तो ढेरों कीर्तिमान अपने नाम किये थे! सबसे गंभीर और दुर्भाग्यपूर्ण कीर्तिमान चुनाव बाद सामने आया!

चुनाव बाद हुए सर्वे में प्रतिनिधियों के दिए एफिडेविट से पता चला, भारत की संसद में 82% करोड़पति घुस चुके हैं! अकेले लोअर हॉउस(लोकसभा) के 541 सदस्यों में 442 सदस्य ऐसे हैं जिनकी चल अचल संपत्ति करोड़ों में या उससे ऊपर है! 15 सांसद ऐसे हैं जो अरबपति हैं! इनमे सबसे ज्यादा सदस्य आंध्र प्रदेश से हैं! इसीलिए भारतीय राजनीति के इतिहास में वर्तमान(16 वीं) संसद को "धनवानों" की सभा कहा जाता है! वही अपर हाउस(राज्यसभा) में इनकी तादाद 90% है! कुल 233 सदस्यों में से 205 सदस्य करोड़पति हैं!

जैसा कि मैंने ऊपर बताया.......परिणाम, समूह के सदस्यों की औकात तथा ओहदे पर निर्भर करते हैं! कुछ ऐसा ही परिणाम भारत के इस घर में हुई बैठकों से बाहर निकलता है!

इस घर के दोनों फ्लोर के सारे करोड़पति तथा अरबपति मिलकर गरीबों के उत्थान के लिए आवाज उठाते हैं! उनके लिए योजनाएं बनाते हैं! खुद की आय अधिकतम है, लेकिन किसानों की फसल का न्यूनतम समर्थन मूल्य यही लोग तय करते हैं! सैनिकों से लेकर अफसरों और तमाम कर्मचारियों के साथ साथ मजदूरों की दिहाड़ी भी यही लोग तय करते हैं!

ये भले लोग कुछ सामाजिक कार्य भी करते हैं! खुद के विरोध में उठी हर आवाज का नामकरण भी यही करते हैं! वनों जंगलों में रहने वाले जिले भर के लोगों को नक्सली घोषित कर देते हैं क्युकी उस जिले के लोगों ने इन्हे अपनी जमीनें देने से मना कर दिया था! सैकड़ों किलोमीटर पैदल चलकर आये किसानों को वामपंथी घोषित कर देते हैं, क्युकी वे अपना हक मांग रहे थे! ख़राब खाने की शिकायत पर एक सैनिक को देशद्रोही घोषित कर देते हैं! सांप्रदायिक बयान के बाद भड़की हिंसा में मारे लोगों के लिए मुआवजे का एलान भी यही करते हैं! छात्रों, अध्यापकों, मजदूरों वगैरह पर लाठीचार्ज का फैसला भी इसी घर के लोग करते हैं!

समाज के लिए इतना सारा करते हैं तो खुद के भी कुछ न कुछ करते ही होंगे? बिलकुल करते हैं!

सरकारी कर्मचारियों का वेतन 10 साल में एक बार रिवाईस करते हैं, लेकिन खुद का वेतन हर पांच साल में बढ़ा लेते हैं! पिछले साल फ़रवरी में ही बढ़ाया है! बस,ट्रेन और हवाई जहाज में मुफ्त में सैर करते हैं!अनलिमिटेड कालिंग के ज़माने में हर महीने 15000रूपये टेलीफोन भत्ता के नाम पर लेते हैं! लोगों से सब्सिडी छोड़ने की अपील करते हैं, लेकिन खुद संसद की कैंटीन में सब्सिडी डकारते हैं! एक सैनिक,15 साल की नौकरी के बाद पेंशन का हकदार होता है, लेकिन ये सदन की पहली बैठक के बाद ही पेंशन के हकदार हो जाते हैं!

...... और तो और,खुद ही दोनों सदनों में हंगामा करते हैं और तमाशे का पैसा जनता से वसूल करते हैं!

तमाशा भी ऐसा वैसा नहीं है!
एक ऐसा तमाशा है जिसको देखने के लिए भारत की जनता, प्रति मिनट ढाई लाख रूपये भी देती है और जब इन महानुभावों पर हमला होता है तो यही जनता खुद के सीने पर गोली भी खाती है!

Via कपिल देव sir

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