Tuesday, January 1, 2019

बुद्धिमत्ता क्या है?

मेरी बुद्धिमत्ता की परिभाषा जरा अलग है। मैं बुद्धिमत्ता को तीन भागों में बांटती हूं।
बुद्धिमत्ता 《1》
आइए इसे समझें। एक इंसान गर्मी में रात को छत पर सोता है, मच्छरदानी लगा कर। अब मच्छरदानी में छेद है जिससे मच्छर उसे तंग करते हैं। आदमी बुद्धिमत्ता का प्रयोग करता है और मच्छरदानी की दूसरी और भी एक उतना ही छेद कर देता है और एक पतली सी पाइप आर पार कर देता है। अब मच्छर एक छेद से घुसते भी हैं तो मच्छरदानी के अंदर ना जाकर दूसरे सिरे से बाहर निकल आते हैं। आदमी चैन की नींद सोता है। हमें भी नकारात्मक विचारों, लोगों और भावों को इसी बुद्धिमत्ता के प्रयोग द्वारा अपने जीवन में घुसने से रोकना है। यह व्यवहारिक बुद्धिमत्ता है
बुद्धिमता 《2》
एक गाँव में एक बुद्धिमान व्यक्ति रहता था। उसके पास 19 ऊंट थे। एक दिन उसकी मृत्यु हो गयी। मृत्यु के पश्चात वसीयत पढ़ी गयी। जिसमें लिखा था कि:
मेरे 19 ऊंटों में से आधे मेरे बेटे को, उसका एक चौथाई मेरी बेटी को, और उसका पांचवाँ हिस्सा मेरे नौकर को दे दिए जाएँ।
सब लोग चक्कर में पड़ गए कि ये बँटवारा कैसे हो ?
19 ऊंटों का आधा अर्थात एक ऊँट काटना पड़ेगा, फिर तो ऊँट ही मर जायेगा। चलो एक को काट दिया तो बचे 18 उनका एक चौथाई साढ़े चार- साढ़े चार फिर??
सब बड़ी उलझन में थे। फिर पड़ोस के गांव से एक बुद्धिमान व्यक्ति को बुलाया गया
वह बुद्धिमान व्यक्ति अपने ऊँट पर चढ़ कर आया, समस्या सुनी, थोडा दिमाग लगाया, फिर बोला इन 19 ऊंटों में मेरा भी ऊँट मिलाकर बाँट दो।
सबने पहले तो सोचा कि एक वो पागल था, जो ऐसी वसीयत कर के चला गया, और अब ये दूसरा पागल आ गया जो बोलता है कि उनमें मेरा भी ऊँट मिलाकर बाँट दो। फिर भी सब ने सोचा बात मान लेने में क्या हर्ज है।
19+1=20 हुए।
20 का आधा 10 बेटे को दे दिए।
20 का चौथाई 5 बेटी को दे दिए
20 का पांचवाँ हिस्सा 4 नौकर को दे दिए।
10+5+4=19 बच गया एक ऊँट जो बुद्धिमान व्यक्ति का था वो उसे लेकर अपने गॉंव लौट गया।
सो हम सब के जीवन में 5 ज्ञानेंद्रियाँ, 5 कर्मेन्द्रियाँ, 5 प्राण, और 4 अंतःकरण चतुष्टय( मन,बुद्धि, चित्त, अहंकार) कुल 19 ऊँट होते हैं। सारा जीवन मनुष्य इन्हीं के बँटवारे में उलझा रहता है और
जब तक उसमें आत्मा रूपी ऊँट नहीं मिलाया जाता यानी के आध्यात्मिक जीवन (आध्यात्मिक बुद्धिमत्ता) नहीं जिया जाता, तब तक सुख, शांति, संतोष व आनंद की प्राप्ति नहीं हो सकती।
लेकिन हमारे जीवन का यह हाल है जो इस तस्वीर में दिख रहा है “ अजब गजब नजारा है इस दुनिया का, दोनों हाथों से सब कुछ बटोरने में लगे हैं, फिर खाली हाथ जाने के लिए” आध्यात्मिक बुद्धिमत्ता बताती है कि सारी जिंदगी जो इकट्ठा करते हैं वह अंत समय कचरा ही साबित होता है और इस बुद्धिमत्ता के अनुसार हमें शॉर्ट टर्म इन्वेस्टमेंट नहीं लोंग टर्म इन्वेस्टमेंट करनी है और वह है सत्कर्म, प्रभु स्मरण और पुण्य। सिर्फ वही बैग हमारे साथ दूसरी दुनिया में जा सकेगा।
बुद्धिमत्ता 《3》
मृत्यु के पश्चात जब स्थूल शरीर त्याग कर, सूक्ष्म और कारण शरीर के साथ धर्म राय के दरबार में अपराधी की तरह खड़े होते हैं, धर्मराज हमारे सारे अपराध एक-एक करके बोलता है। मानव इंकार करता है तो फिर वही ज्ञानेंद्रियां आंख , नाक, कान मुंह, त्वचा हमारे विरुद्ध गवाही देती हैं। हां! इस ने वह फलाना अपराध किया। एक एक ज्ञानेंद्री बोलती है, हमारे पास कोई चारा ही नहीं होता और हमारी सजा निश्चित होती जाती है। अब बुद्धिमता यह है कि इन ज्ञान इंद्रियों के द्वारा ऐसे कर्म ना हो जिनसे धर्म राय की अदालत में शर्मिंदा होना पड़े।
नया साल उनको ही मुबारक है, जो उपरोक्त सभी बुद्धिमत्ता को अपनाकर अपने जीवन को नई दिशा देते है और बेहतर बनाते हैं। बाकी हम सब के लिए तो सिर्फ तारीख बदली है और जिंदगी के कैलेंडर से 1 साल और कम हो गया है।

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