Sunday, October 27, 2019

इंसान की असलियत की पहचान उसके व्यवहार और उसकी नीयत से होती है।



एक राजा के दरबार मे एक अजनबी इंसान नौकरी मांगने के लिए आया। उससे उसकी क़ाबलियत पूछी गई, तो वो बोला- "मैं आदमी हो चाहे जानवर, शक्ल देख कर उसके बारे में बता सकता हूँ। राजा ने उसे अपने खास "घोड़ों के अस्तबल का इंचार्ज" बना दिया। कुछ दिनों बाद राजा ने उससे अपने सब से महंगे और मनपसन्द घोड़े के बारे में पूछा, उसने कहा- "नस्ली नही हैं।" राजा को हैरानी हुई, उसने जंगल से घोड़े वाले को बुला कर पूछा, उसने बताया, घोड़ा नस्ली तो हैं, पर इसकी पैदायश पर इसकी माँ मर गई थी, ये एक गाय का दूध पी कर उसके साथ पला है। राजा ने अपने नौकर को बुलाया और पूछा तुम को कैसे पता चला के घोड़ा नस्ली नहीं है ?" उसने कहा- "जब ये घास खाता है तो गायों की तरह सिर नीचे करके, जबकि नस्ली घोड़ा घास मुँह में लेकर सिर उठा लेता हैं। राजा उसकी काबलियत से बहुत खुश हुआ, उसने नौकर के घर अनाज, घी, मुर्गे, और अंडे बतौर इनाम भिजवा दिए। और उसे रानी के महल में तैनात कर दिया। कुछ दिनों बाद, राजा ने उस से रानी के बारे में राय मांगी, उसने कहा- "तौर तरीके तो रानी जैसे हैं लेकिन पैदाइशी नहीं हैं।" राजा के पैरों तले जमीन निकल गई, उसने अपनी सास को बुलाया, मामला उसको बताया, सास ने कहा "हक़ीक़त ये हैं, कि आपके पिताजी ने मेरे पति से हमारी बेटी की पैदाइश पर ही रिश्ता मांग लिया था, लेकिन हमारी बेटी 6 माह में ही मर गई थी, लिहाज़ा हम ने आपके रजवाड़े से करीबी रखने के लिए किसी और की बच्ची को अपनी बेटी बना लिया।"

राजा ने फिर अपने नौकर से पूछा "तुम को कैसे पता चला ?" उसने कहा- "रानी साहिबा का नौकरों के साथ सुलूक गँवारों से भी बुरा हैं। एक खानदानी इंसान का दूसरों से व्यवहार करने का एक तरीका होता हैं, जो रानी साहिबा में बिल्कुल नही। राजा फिर उसकी पारखी नज़रों से खुश हुआ और बहुत से अनाज, भेड़ बकरियां बतौर इनाम दीं साथ ही उसे अपने दरबार मे तैनात कर दिया।
कुछ वक्त गुज़रा, राजा 4ने फिर नौकर को बुलाया, और अपने बारे में पूछा। नौकर ने कहा- "जान की सलामती हो तो कहूँ।" राजा ने वादा किया।
उसने कहा- "न तो आप राजा के बेटे हो और न ही आपका चलन राजाओं वाला है।" राजा को बहुत गुस्सा आया, मगर जान की सलामती का वचन दे चुका था, राजा सीधा अपनी माँ के महल पहुँचा।
माँ ने कहा- "ये सच है, तुम एक चरवाहे के बेटे हो, हमारी औलाद नहीं थी, तो तुम्हें गोद लेकर हम ने पाला।"
राजा ने नौकर को बुलाया और पूछा- बता, "तुझे कैसे पता चला ?" उसने कहा- "जब राजा किसी को इनाम दिया करते हैं, तो हीरे मोती और जवाहरात की शक्ल में देते हैं। लेकिन आप भेड़, बकरियां, खाने पीने की चीजें दिया करते हैं। ये रवैया राजाओं का नही, किसी चरवाहे के बेटे का ही हो सकता है।"
"इंसान के पास कितनी धन दौलत, सुख समृद्धि, रुतबा, इल्म, बाहुबल हैं ये सब बाहरी दिखावा है। इंसान की असलियत की पहचान उसके व्यवहार और उसकी नीयत से होती है।"

कुछ अच्छे एंड्रॉइड गेम

यहाँ मैं उन गेम्स को शेयर करूँगा जिन्हें मैंने खेला है और काफी अच्छा पाया है। चलिए बात करते हैं कुछ अच्छे एंड्राॅॅइड गेम के बार में—
रेटिंग्स: 4.6, डाउनलोड: 1 करोड़+
इसके सरल परन्तु हृदयस्पर्शी ग्राफ़िक्स और बैकग्राउंड का मनमोहक संगीत, इस गेम को अपनी श्रेणी में अलग बनाते हैं। Harry Nesbitt ने अपने जीवन के 4 वर्ष इसके निर्माण में समर्पित किए हैं। इसे खेलते वक्त (खासकर जेन मोड में) आप खुद को सभी से मुक्त चिंताओं पाओगे। यह 'एडिटर्स चॉइस' भी है।
रेटिंग्स: 4.7, डाउनलोड: 50 लाख+
यह अल्टोज एडवेंचर की अगली कड़ी है। जहाँ अल्टोज एडवेंचर में अल्टो बर्फ है, यहाँ रेगिस्तान है। साथ-साथ इसमें लेवेल्स के हिसाब से बैकग्राउंड व् फीचर बदलते रहते हैं। एनीमेशन इसकी भी शानदार है और संगीत भी मनमोहक है। अल्टोज एडवेंचर के तरह ही यह भी 'एडिटर्स चॉइस' बना हुआ है।
रेटिंग्स: 4.7, डाउनलोड: 1 करोड़+
यह एक पजल गेम है। इसका गमेप्ले आपको रिलैक्स करेगा और साथ ही दिमागी कसरत भी होती रहेगी। इस गेम में रोबो को विभिन्न बाधाओं को पार कराकर लक्ष्य तक पहुंचना होता है। यह भी एक बेहतरीन गेम है और यह भी 'एडिटर्स चॉइस' है।
रेटिंग्स: 4.6, डाउनलोड: 1 करोड़+
अगर आप क्रिकेट के दीवाने हैं तो इससे अच्छा गेम आपके लिए कोई हो ही नहीं सकता है। इसमें टेस्ट क्रिकेट, एकदिवसीय क्रिकेट, टी-20 क्रिकेट और प्रैक्टिस मोड जैसे फीचर हैं तो साथ-ही-साथ प्लेयर्स का चेहरा एडिट करना, हिंदी कमेन्ट्री आदि न जाने कितने ही अलग चीजें हैं। जो कुछ आप एक क्रिकेट मैच में देखते होंगे, इसमें वो सभी हैं, शब्दों में यह गेम व्यक्त नहीं किया जा सकता है। यह 'एडिटर्स चॉइस' है।
रेटिंग्स: 4.5, डाउनलोड: 1 करोड़+
एक पूर्णतः भारतीय गेम। इस गेम के अन्दर 8 और गेम हैं! जो इस प्रकार हैं— वर्ड हंट, शब्द खोज, चार अक्षरी (बर्फी), सांप-सीढ़ी, देसी क्विज (मेरा पसंदीदा), लूडो, स्नेक व् ब्रिक्स। भविष्य में इसमें और गेम भी एड होंगे। इस हमें में कॉइन के स्थान पर जलेबी का प्रयोग करना अच्छा लगा। यहाँ आप चाहें तो किसी भी मिनी गेम में प्रतिद्वंद्वी को ऑनलाइन भी टक्कर दे सकते हैं! इस भारतीय गेम को भी एक बार जरुर ट्राय करें।
रेटिंग्स: 4.4, डाउनलोड: 50 करोड़+
व्याख्या की कोई आवश्यकता नहीं!
इसका अगला भाग भी ट्राय करें: हिल क्लाइंब रेसिंग 2 (लिंक: Hill Climb Racing 2 - Apps on Google Play)
रेटिंग्स: 4.4, डाउनलोड: 1 करोड़+
एंग्री बर्ड्स सीरीज का यह गेम मुझे सबसे अधिक पसंद है। कारण है इसके बड़ी मात्रा में लेवल व् उम्दा कहानी। ग्राफ़िक्स भी शानदार हैं। यह गेम भी आप ट्राय कर सकते हैं।
इसका एक और भाग भी ट्राय करें: एंग्री बर्ड्स 2 (लिंक: Angry Birds 2 - Apps on Google Play)
रेटिंग्स: 4.4, डाउनलोड: 1 करोड़+
यह मेरे पसंदीदा गेम्स में से एक है। गेम में विभिन्न पौधों द्वारा ज़ोंबीज को मारने की कहानी मुझे काफी अच्छी लगी। अगर आपने अभी तक यह खेला नहीं है तो एक बार जरुर खेलें, आप निराश नहीं होंगे! यह भी 'एडिटर्स चॉइस' है।
इसका अगला भाग प्लांट्स वर्सेज ज़ोंबीज 2 भी काफी अच्छा है। जहाँ इसके प्रथम भाग में 100 के आस-पास लेवेल्स हैं वहीं इसके दुसरे भाग में 550+ लेवेल्स हैं! (लिंक यह रहा: Plants vs Zombies™ 2 Free - Apps on Google Play)
सभी चित्रों का स्रोत: play.google.com

उम्मीद है आपको यह गेम्स पसंद आयेंगे। 

कौनसा मोबाइल एप्लीकेशन खतरनाक हो सकता है?


आपने ख़तरनाक एप्लिकेशन के बारे में पूछा है तो मैं बताना चाहूंगा की आजकल प्लेस्टोर पर ऐसे बहुत से ऐप हैं जो हमारे लिए बहुत ही खतरनाक साबित हो सकते हैं।प्लेस्टोर ही नहीं अपितु अब तो आईओएस पर भी बहुत ही खतरनाक ऐप हैं जिन्हें रोज ये ऐप स्टोर बाहर का रास्ता दिखा रहे हैं,हर रोज।
मजे की बात यह है कि उनके मिलीयन मिलीयन डाउनलोड हैं।और हमें पता भी नहीं कि ये हमारे साथ क्या करने वाले हैं। क्योंकि जब हम इन्हें डाउनलोड करते हैं तो बिना जानकारी के ही इंस्टाल कर लेते हैं।हम यह भी नहीं देखते कि ये हमसे किस किस चीज की परमिशन मांग रहे हैं,बस हम सीधे ही अलाउ कर देते हैं,और तब तक करते रहते हैं जबतक कि वह इंस्टॉल ना हो जाए।
इस बात से हमें कोई फर्क नहीं पड़ता है,हम तो बस यही चाहते कि बस ऐप इंस्टॉल हो जाए बाकी सब भाई संभाल लेगा।😂😂
इन सब के बारे में तो मैं आपको इस जवाब में नहीं बता पाऊंगा, क्योंकि आप जानते हैं कि यह संभव नहीं है। फिर भी एक ऐप दिखाता हूं आपको।
जानते होंगे आप शायद,
अगर इसे कोई नही जानता है तो समझ लें कि उसने आज तक मोबाइल फोन चलाया ही नहीं है। आपके फोन में भी होगा?
हैं ना।
चलिए इसके कारनामे दिखाए जाऐं।
भाई साहब मोबाइल को कहीं रख भी नहीं सकते।
मजे की बात, डाटा ओफ होने के बाद भी नोटिफिकेशन। 👏🏻👏🏻👏🏻
भाई साहब पहली बार कोई भी वेबसाइट पर जाएं पहले एक बार खुद सैर कराएगा किसी अन्य वेबसाइट पर,उसके बाद आपकी बात मानेगा।
अब आप ही बताइए इससे खतरनाक क्या होगा? सही में बहुत ख़तरनाक है ये।
विशेष सूचना:-कोई भी ऐप्लिकेशन इंस्टॉल करने से पहले परमिशन जरूर चैक करें । अगर आपको कुछ अजीब लगे तो ऐप्लिकेशन बिल्कुल भी इंस्टाल ना करें।
जैसे:- कल मैंने एक वीडियो एडिटिंग ऐप इंस्टॉल करने के लिए क्लिक किया तो परमिशन में फोनबुक,कांटेक्ट की परमिशन मांग रहा था।😲
ये तो वही बात हुई कि मेरे घर सब्जीवाला सब्जी बेचने आया और पूछ रहा है कि, भईया आपकी गर्लफ्रेंड का नम्बर क्या है।🤪🤪
बाकी आप स्वयं समझदार हैं,समझ गए होंगे कि मैं क्या कहना चाह रहा हूं

पहले जब हम स्मार्टफोन खरीदते थे तो बैटरी को बाहर निकाला जा सकता था अब जो स्मार्टफोन आते हैं उसमें बैटरी अंदर ही फिड क्यों आती है ?

आपको शायद यकीन ना हो पर सबसे ज्यादा विकास बैटरीयों का ही हुआ है। क्योंकि बैटरी का इतिहास मुश्किल से 250वर्ष पुराना है।
अब बात आती है आज की, तो आज बैटरी के क्षेत्र में सर्वाधिक विकास के साथ ही इनके दोषों को भी बहुत हद तक सुधार किया जा चुका है।अब इन बैटरीज को आप कैसे भी वातावरण में काम ले सकते हैं।
आज बैटरी अन्दर ही क्यों आती है:- इसकी मुख्य वजह है हमारी अज्ञानता, सही में। क्योंकि जब बैटरी खराब हो जाती थी तो हम उसे दूसरी बैटरी से रिप्लेस कर देते थे और कम रूपए की वजह से कोई भी एरी गेरी बैटरी को काम में लेने लग जाते थे। जिससे बैटरी फटने की समस्या बढ़ गई थी।
तब कम्पनियों ने बैटरी को इनबिल्ट रखना शुरू कर दिया। जिससे कम्पनियों को बहुत फायदे हुए।
1.सामान्य रूप से हम बैटरी नहीं बदल सकते, इसके लिए हमें सर्विस सेंटर जाना पड़ता है। जिससे कम्पनियों की आय में भी वृद्धि होती है।
2.आप सर्विस सेंटर पर कोई भी एरी गेरी बैटरी नहीं डलवा सकते,तो बैटरी के फटने की समस्या में काफी हद तक सुधार हुआ है। और उनके प्रोडक्ट भी आसानी से बिक जाते हैं।
3.बैटरी इनबिल्ट होने से ही फोन के डिजाइन में इतना बदलाव संभव हो पाया है कि आज हमें बिल्कुल पतले साइज के मोबाइल देखने को मिल रहे हैं।
अब अगर आप मेरे जवाब से संतुष्ट हैं तो अपवोट जरूर किजिएगा। अगर अब भी कोई बात आपके जेहन में घूम रही है तो कमेंट बॉक्स में आपका स्वागत है।और हो सके तो हमें फॉलो जरूर करें।

Saturday, October 19, 2019

हिन्दू धर्म में 108 का क्या रहस्य है आओ जाने

भारत में जीवन के सभी रहस्यों को प्रतीकों में गूँथा गया है। प्रत्येक प्रतीक अपने आप में अनूठा है ।

 इन्हीं प्रतीकों की श्रंखला में 108 सबसे महत्वपूर्ण है। 108 को सर्वाधिक महत्वपूर्ण पवित्र संख्या माना गया है। 

इसके पीछे एक नहीं बल्कि कई कारण है । 

उन कारणों में से एक महत्वपूर्ण कारण गणित को हिन्दू धर्म में दिया गया महत्व हैं 

गणित केवल मापन या संख्या का ही नहीं अभिव्यक्ति का भी एक माध्यम है उदाहरण के लिए बायनरी लैंग्वेज । सृष्टि या सृजन की अपनी भाषा गणित स्वयं है। प्रकृति अपने को अभिव्यक्त करने के लिए गणित का सहारा लेती है। सृष्टि में सब कुछ गणितीय अनुपात में हैं और यहां अव्यवस्थित, असंगत कुछ भी नहीं। विज्ञान भी कहता हैं की मनुष्य ने गणित का आविष्कार नहीं किया हैं बल्कि उसे खोजा हैं . गणित सृष्टि और प्रकृति में पहले से ही अस्तित्व में हैं .
इसी गणित को हमारे ऋषियों ने गहन अध्ययन व साधना से समझा हैं व उन्होंने गणित के क्षेत्र में कई अभूतपूर्व खोजे की . हमारे श्रेष्ठ गणितज्ञ या तो ऋषि थे या ऋषि ही श्रेष्ठ गणितज्ञ थे. आर्यभट्ट, याज्ञवल्क्य, बोधायन , कात्यायन , वराहमिहिर आदि कई नाम गणित के प्रति समर्पित अध्यात्मिक व्यक्तियों के हैं .
आधुनिक भारत के महान गणितज्ञ श्री निवास रामानुजन के नाम के साथ ही उनकी कुलदेवी का भी नाम लिया जाता है। इन्होने शून्य और अनन्त को हमेशा ध्यान में रखा और इसके अंतर्सम्बन्धों को समझाने के लिए गणित के सूत्रों का सहारा लिया। रामानुजन के कार्य करने की एक विशेषता थी। पहले वे गणित का कोई नया सूत्र या प्रमेंय पहले लिख देते थे लेकिन उसकी उपपत्ति पर उतना ध्यान नहीं देते थे। इसके बारे में पूछे जाने पर वे कहते थे कि यह सूत्र उन्हें नामगिरी देवी की कृपा से प्राप्त हुए हैं। रामानुजन का आध्यात्म के प्रति विश्वास इतना गहरा था कि वे अपने गणित के क्षेत्र में किये गए किसी भी कार्य को आध्यात्म का ही एक अंग मानते थे। वे धर्म और आध्यात्म में केवल विश्वास ही नहीं रखते थे बल्कि उसे तार्किक रूप से प्रस्तुत भी करते थे। वे कहते थे कि "मेरे लिए गणित के उस सूत्र का कोई मतलब नहीं है जिससे मुझे आध्यात्मिक विचार न मिलते हों।”
तो गणित अध्यात्मिक रहस्यों की कुंजी की तरह हिन्दू धर्म में कार्य कर रहा हैं और हर अंक महत्वपूर्ण हैं और गणना का विशेष प्रयोग धर्म के हर अंग में होता रहा . जैसे काल गणना, मुहूर्त गणना , सम या विषम संख्या का आग्रह रखना।
हम राशी में १०१ , १२१ जेसे अंको को महत्व देते हैं और विभिन्न रीतियों और नियमों के साथ अंको या गणित को साथ में ले कर चलते हैं . इन्हें कई आध्यात्मिक प्रतीकों में उपयोग किया गया और लगभग हर अंक को अपना महत्व दिया जैसे -
1 - ईश्वर या प्रारम्भ
2 - जीव व ब्रह्म ,
3 - तीन लोक , त्रिदेव, त्रिदेवियाँ, त्रिगुण, त्रिकाल
4- चतुर्युग, चार पुरुषार्थ, चार वेद
5 - पंच परमेश्वर ( देव पंचायतन ) ,पंचतत्व, पांच कर्मेन्द्रियाँ, पाँच ज्ञानेन्द्रियाँ, पञ्च मकार
6- षडरस
7- सप्त लोक , सप्त सुर , सप्त पुरियां , सप्त ऋषि
8- अष्ट दिशाएँ , अष्टांग योग , अष्ट सिद्धि , अष्ट धातु
9- नव रात्र , नव दुर्गा , नव ग्रह
इसी श्रंखला में शीर्ष पर १०८ का दिव्य, पवित्र या जादुई अंक विराजमान हैं . इस अंक को समझने से पहले हम १, ० और 8 के अंक को समझते हैं .
8 के अंक को माया का प्रतीक माना जाता हैं . माया को सदैव आठ के अंग के साथ दर्शाया जाता हैं , सोचने की बात हैं की आठ ही क्यों ?
8 को 1 , 0 और 9 के अतिरिक्त किसी भी अंक गुणा करो मूल परिणाम हमेशा घट कर आएगा .
उदा. - 8 * 2 = 16 . ( 1 + 6 = 7 )
8 * 3 = 24 . ( 2 + 4 = 6 )
8 * 4 = 32. ( 3 + 2 = 5 )
8 * 5 = 40 . ( 4 + 0 = 4 )
8* 25 = 200 . ( 2 +0+ 0 = 2 )
दिखाई बढ़त देती हैं पर पर मूल अंक घट गया होता हैं . माया का भी यही स्वभाव बताया गया हैं की जो दिख रहा हैं वो हैं नहीं और जो हैं वो दिख नहीं रहा हैं . माया सदैव भ्रम की रचना करती हैं.
108 का योग करने पर हमें 9 की संख्या मिलती हैं .
1 + 0 + 8 = 9
9 को पूर्णांक कहते हैं , सर्वाधिक बड़े मूल्य का एकल अंक . 9 को ईश्वरीय शक्ति का प्रतीक कहते हैं . माता आदि शक्ति को स्रष्टि की रचना शक्ति कहा गया हैं जो पूर्ण और अखंड हैं .
पूर्णांक 9 को जब हम अन्य अंको से गुणा करते हैं तो परिणाम हमेशा 9 ही आता हैं .
9 * 2 = 18 . ( 1 + 8 = 9 )
9 * 3 = 27 . ( 2 + 7 = 9 )
9 * 4 = 36 . ( 3 + 6 = 9 )
9 * 5 = 45 . ( 4 + 5 =9 )
9 * 25 = 225 . ( 2 +2 +5 =9 )
ईश्वर को किसी से भी गुणा करो , परिणाम हमेशा ईश्वर ही होता हैं और ईश्वरीय शक्ति किसी भी परिस्थितियों में अपने मूल स्वभाव में ही स्तिथ रहती हैं .
ॐ पूर्णमद: पूर्णमिदं पूर्णात् , पूर्ण मुदच्यते,
पूर्णस्य पूर्णमादाय, पूर्ण मेवा वशिष्यते। (ईश उपनिषद)
मन्त्र का अर्थ: वह जो (परब्रह्म) दिखाई नहीं देता है, वह अनंत और पूर्ण है। क्योंकि पूर्ण से पूर्ण की ही उत्पत्ति होती है। यह दृश्यमान जगत भी अनंत है। उस अनंत से विश्व बहिर्गत हुआ। यह अनंत विश्व उस अनंत से बहिर्गत होने पर भी अनंत ही रह गया।
यही नियम शून्य पर भी लागु होते हैं , शून्य अपना स्वभाव नहीं बदलता और पूर्ण ही रहता हैं .
इसलिए पूर्ण के दो प्रकार 108 के अंक में हमारे पास हैं ।
पूर्णता 0 और पूर्णांक 9 .
108 का अंक ईश्वरीय पूर्णता, सृष्टि की रचना और जीवन का प्रतीक हैं .
108 का अंक हमारे ब्रह्माण्ड की रचना के सिद्धांत BIG BANG THEORY का भी सूत्र हैं .
उपनिषद कहते हैं की ब्रह्मांड एक प्रोजेक्शन के समान हैं जिसका संकुचन और प्रसार पुनः पुनः होता हैं तो 108 वो प्रतीक हैं जो असंख्य बार ब्रह्माण्ड के विस्तार और पुनः संकुचन अर्थार्थ प्रलय को दर्शाता हैं .
एक बात और यहाँ गोरतलब हैं की ब्रहमांड एक निरंतर प्रसारित होती हुई रचना हैं जैसे कोई गुब्बारा जो फूलता ही जा रहा हैं, एक तारा दुसरे तारे से निरंतर दूर जा रहा हैं और यह कितना अभी और फैलेगा इसका हमारे वेज्ञानिकों के पास कोई स्पष्ट उत्तर नहीं हैं इसलिए इसे EXPANDING UNIVERSE कहते हैं .
हम संस्कृत में इसे वैदिक काल से ही ब्रहमांड कहते आयें हैं ब्रह्म शब्द का अर्थ ही निरंतर होता हुआ असीमित विस्तार हैं, ब्रह्माण्ड से अर्थ एक ऐसे अंड से हैं जो सभी दिशाओं में निरंतर प्रसारित हो रहा हैं .
अब 108 के अंक में इस विस्तार का भी सूत्र छुपा हुआ हैं .
1 = उस विलक्षणता का प्रतिनिधित्व करता हैं , जो इस ब्रह्माण्ड का बीज हैं या जिससे यह ब्रह्माण्ड फेला था .
0 = अनगिनत संख्या में से वर्तमान ब्रह्माण्ड का अंड (प्रतीक )
8 = अनंतता या 8 दिशाओं में विस्तार की सीमा , जहाँ से संकुचन प्रारम्भ होगा .
इसके अतिरिक्त भी हम इस अंक की विलक्षणता और अस्तित्व को कई जगह पर देख सकते हैं .
  1. ज्योतिष के अनुसार के 27 नक्षत्र में से प्रत्यक के 4 चरण होते हैं . 27 * 4 = 108
  2. 12 राशियाँ 9 ग्रहों से प्रभावित होती हैं 12 * 9 = 108
  3. पृथ्वी और सूर्य के बीच की दुरी सूर्य के व्यास से 108 गुणा हैं .
  4. पृथ्वी और चन्द्र के बीच की दुरी चन्द्र के व्यास से 108 गुणा हैं.
  5. सूर्य का व्यास पृथ्वी के व्यास से 108 गुणा बड़ा हैं .
  6. वैदिक परम्परा में 108 उपनिषद
  7. तांत्रिक परम्परा में 108 शक्तिपीठ
  8. वैष्णव परम्परा में 108 देवस्थानम
  9. शैव परम्परा में 108 शिवांग
  10. बौद्ध परम्परा में 108 चिन्ह बुद्ध के चरण पर
  11. जैन परम्परा में 108 पवित्रों के समूह
  12. सिक्ख परम्परा में 108 की ऊन की माला
  13. सनातन परम्परा की अनुवर्ती शाखाओं बौद्ध , सिक्ख व ताओं आदि सभी पंथ की माला में 108 मनके
  14. योग परम्परा में 108 नाड़ियाँ ह्रदय चक्र से सहस्त्रार तक जाती हैं
  15. कला में 108 नृत्य मुद्राएँ व विधाएँ
  16. ध्यान पध्तियाँ 108 प्रकार की
  17. शरीर 108 दबाव बिंदु ( मर्म चिकित्सा , मार्शल आर्ट, एक्यूप्रेशर)
  18. संस्कृत वर्ण माला में 108 वर्ण , 54 अक्षर स्त्री लिंग और 54 अक्षर पुरुष लिंग के
  19. श्री यंत्र में 108 बिंदु , 54 बिंदु शिव और 54 बिंदु शक्ति के
  20. 5 + 1 = 6 इन्द्रियां ( कान - श्रवण , नेत्र - द्रश्य , नासिका - घ्राण, जिह्वा -रस , त्वचा-स्पर्श , मन - विचार ) 3 काल - भूत , वर्तमान और भविष्य , 2 स्तिथि - जीव और ब्रह्म , 3 प्रकार की भावनाएं - राग, द्वेष और तटस्थ ( वीतराग )
  21. 6 *3 *2 *3 = 108
  22. जप माला में 108 अंक आत्मा की 108 स्तिथियों की यात्रा और अनंतता का प्रतीक भी हैं और जप माला में एक मनका अलग से होता हैं जिसे सुमेरु कहते हैं .यह सुमेरु ईश्वर का प्रतीक हैं की उन्ही से जीवन यात्रा प्रारम्भ होती हैं और उन्ही पर पूर्ण इसलिए जप करते समय कभी भी सुमेरु का उल्लघन नहीं किया जाता हैं .
  23. सुमेरु की भिन्नता यह भी दर्शाती हैं की ईश्वर जीवों से भिन्न अपने आप में पूर्ण और एक ही हैं .
  24. 108 अनंतता का सबसे बड़ा प्रतीक हैं और ईश्वर की अनंतता को हम 108 के रूप में स्मरण रखते हैं
  25. जब किसी को अत्यधिक सम्मान देना होता हैं तो भी हम 108 श्री का प्रयोग करते है , इसका अर्थ यही है की वे अनंत श्री से युक्त हैं

विकास के लिए प्रोटीन आवश्यक है।आइए देखते हैं कुछ ऐसे शाकाहारी भोज्य पदार्थ जो प्रोटीन में समृद्ध हैं

  • 3 चम्मच चिया के बीज में 6–9 ग्राम प्रोटीन
  • 3 चम्मच अलसी(flaxseeds) के बीज में 6–8 ग्राम प्रोटीन
  • 3 चम्मच भांग (Hemp seeds) के बीज में 10 ग्राम प्रोटीन
  • 3 चम्मच तिल(Seasame) में 7 ग्राम प्रोटीन
  • आधा कप सोया में 15 ग्राम प्रोटीन
  • 1 मुट्ठी बादाम में 6 ग्राम प्रोटीन
  • दो ब्राउन ब्रेड और 2 टेबलस्पून पीनट बटर में 15 ग्राम प्रोटीन
  • 100 ग्राम राजमा में 8 ग्राम प्रोटीन
  • 1 कप पकी मसूर की दाल में 18 ग्राम प्रोटीन
  • 1 मुट्ठी अखरोट और काजू में 5 ग्राम प्रोटीन
  • 100 ग्राम टोफू में 20 ग्राम प्रोटीन
  • 1 कप पालक में 6 ग्राम प्रोटीन
  • 1 कप मक्के में 5 ग्राम प्रोटीन
  • 1 कप काले चने में 12 ग्राम प्रोटीन
  • 1 कप क्विनोआ में 9 ग्राम प्रोटीन
  • 100 ग्राम ब्रोकोली में 3 ग्राम प्रोटीन
  • 100 ग्राम शकरकंद में 2 ग्राम प्रोटीन
  • 100 ग्राम दूध में 3 ग्राम प्रोटीन
  • 1 कप ग्रीक दही में 9 ग्राम प्रोटीन
  • 100 ग्राम ब्राउन राइस में 3 ग्राम प्रोटीन
संक्षेप में:-
(चित्र:गूगल इमेज एवं पिंटरेस्ट)
धन्यवाद।