Friday, October 4, 2019

क्या हमें मोबाइल पर बात करते समय ईयर फोन का उपयोग करना चाहिए जिससे कि रेडिएशन का ख़तरा कम हो सके?


दरअसल हम जब भी रेडिएशन का नाम सुनते है तो उसको सीधा कैंसर के साथ जोड़ देते हैं। जो कि बिल्कुल गलत हैं।यदि सभी तरह की रेडिएशन से कैंसर होता तो सभी कैंसर के मरीज होते क्योंकि सूर्य प्रकाश भी एक प्रकार की रेडिएशन हैं। आप एक केला खाते हो उसमे भी रेडिएशन होती है। टीवी , एफएम रेडियो, माइक्रोवेव, रिमोट, बल्ब आदि से रेडिएशन निकलती है।दरअसल रेडिएशन 2 प्रकार की होती हैं -

1. आयनीकरण रेडिएशन (Ionizing Radiation)

2. गैर आयनीकरण रेडिएशन ( Non- Ionizing Radiation)

इसमें आयनीकरण रेडिएशन की ऊर्जा, गैर आयनीकरण रेडिएशन से ज्यादा होती है अतः अधिकांश मामलों में कैंसर का कारण ये आयनीकरण रेडिएशन ही होती हैं।मोबाईल फोन से निकलने वाली रेडिएशन, गैर आयनीकरण रेडिएशन के अन्तर्गत आती हैं।

[1]

आप ऊपर चित्र में देख सकते हैं कि मोबाइल रेडियेशन की ऊर्जा दृश्य प्रकाश से भी कम होती है, यदि मोबाईल रेडिएशन से कैंसर होता तो हम जिस प्रकाश में देखते है उस प्रकाश की ऊर्जा ही मोबाईल रेडिएशन से ज्यादा है।मोबाईल फोन से निकलने वाली रेडिएशन की ऊर्जा काफी कम होती है, या आप कह सकते है कि हमारा शरीर इससे भी काफी अधिक मात्रा व ऊर्जा की रेडिएशन को सहने में सक्षम होता है।मोबाइल फोन के प्रयोग को लेकर विभिन्न देशों में शोध हुए, और लगभग सभी शोधों में कैंसर या ब्रेन ट्यूमर का कारण मोबाईल रेडिएशन को नहीं माना गया।

[1] radiation spectrum showing mobile

[2] Cell Phones and Cancer Risk Fact Sheet



By टीकेन्द्र सिंह (Tikendra Singh), RUHS में रेडिएशन टेक्नोलॉजी


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