तांबे के बर्तन में जल को रखते समय क्या सावधानियां रखनी चाहिए :
- बर्तन को निम्बू नमक से अच्छे से साफ़ कर थोड़ी देर उल्टा भी रखे और सूखने दें।
- ताम्बे के पात्र में कोई और धातु जैसे स्टील वगैरह मिली हुई न हो वह शुद्ध ताम्बे का ही पात्र हो। इसके लिए आप तांबे का जग, तांबे का लोटा या गिलास खरीद सकते हैं।
- तांबे का स्वभाव थोड़ा उष्ण है इसलिए गर्मियों में चांदी का सिक्का या चांदी की कुछ छोटी सी चीज डाल दें इसमें ठंडक के गुण आ जाते हैं।
- तांबे के बर्तन में जब जल को रखें तो उसे ढकना बिल्कुल ना भूलें।
- 8 घंटे से ऊपर जब तांबे के बर्तन में पानी रहता है तब जाकर उसमें ताम्बें के गुण आते हैं।
- रोज तांबे के बर्तन में नया जल भरें और पुराने जल में ही नया जल न मिलाएं। पुराने भरे जल में बार-बार नया पानी ना डालें।
- तांबे के पानी को पीने के लिए स्टील, एलुमिनियम या पीतल का इस्तेमाल ना करें। आप चीनी मिट्टी का बर्तन इस्तेमाल कर सकते हैं या सीधे उस बर्तन से पानी पीजिए। नहीं तो उस पानी में तांबे के साथ अन्य धातुओं के गुण भी समाहित हो जायेंगें।
- फ्रिज में जल भरा तांबे का बर्तन नहीं रख सकते हैं क्योंकि फ्रिज में भी गैसेस होती हैं तांबा जल्दी रियेक्ट करता है और लाभ की जगह हानि हो सकती है।
- 3 महीने बाद 1 महीने के लिए कॉपर का पानी बंद कर देना चाहिए क्योंकि किसी भी चीज की अधिकता शरीर में नुकसान कर सकती है।
तांबे के बर्तन का पानी सुबह ही क्यों पीना चाहिए :
- सुबह खाली पेट ही यह पानी पीना अच्छा होता है आंतों की सफाई हो जाती है जिससे दोबारा खाया हुआ भोजन पचेगा। अब जैसे गंदे बर्तन में कोई भोजन खाना नहीं चाहता तो बर्तन की सफाई की तरह आंतों की सफाई करके दोबारा भोजन करना अच्छा होता है। इसलिए सुबह सुबह खूब सारा तांबे में रखा हुआ जल पीना अच्छा होता है। इसका साइंटिफिक कारण भी है की ताम्बें को पाचने के लिए शरीर में थोड़ा सा एसिडिक माहौल चाहिए होता है। आपने देखा होगा कि तांबे का बर्तन नींबू , सिरके या किसी भी खट्टी चीज के साफ करने से जल्दी साफ हो जाता है इसका मतलब है ताम्बा खटी चीज से जल्दी घुलता है और पेट में रात भर पाचन क्रिया चलती है जिससे थोड़ा सा एसिडिक माहौल होता है। इससे तांबा पच जाता है इसलिए सुबह सुबह सादा पानी पीना अच्छा होता है।
- इसका दूसरा कारण है कि रात का जमा सलाइवा शरीर के अंदर जाना चाहिए, इसलिए इसे ब्रश करने से पहले पीना चाहिए। अगर किसी के मुंह में खून आता है तो उसे हल्का सा कुला पहले कर लेना चाहिए और फिर इस पानी को पीना चाहिए।
- सुबह सबसे पहला पानी जो शरीर को मिलना चाहिए उसमें कुछ भी मिला हुआ नहीं होना चाहिए वह शुद्ध जल होना चाहिए ताकि वह हमारी आंतों को साफ कर सके। अगर शहद या निम्बू पानी भी पीना हो तो १० मिनट बाद में पियें। आँतों और शरीर की सफाई के लिए उसमे कुछ नहीं मिलाएं। आप खुद ही सोचिये किसी चीज को साफ़ करने के लिए पहले साफ़ जल से धोना पड़ता है उसमें कुछ मिला कर नहीं धोया जा सकता है।
- तांबे के बर्तन में ड्राई फ्रूट या मेथी दाना नहीं भिगोये।
- आप दिन भर यह पानी पी सकते हैं पर सुबह पीने से ज्यादा लाभ मिलता है।
तांबे के बर्तन में रखे जल को पीने के लाभ :
- वैज्ञानिकों का कहना है कि 8 घंटे से ऊपर जब तांबे के बर्तन में पानी रहता है तो उसमें हानिकारक रोगाणुओं व अन्य रोगों की जीवित कोशिका श्रंखला को नष्ट करने की क्षमता आ जाती है।
- वास्तव में तांबा पानी के शोधन के लिए सबसे सस्ता और उपयोगी साधन है आयुर्वेद के अनुसार तांबे में रखें जल से हमारे शरीर के विषाक्त पदार्थ बाहर निकल जाते हैं।
- आंतों को साफ करता है शरीर की क्रियाओं को तेज करता है इससे वजन घटाने में मदद करता है।
- त्वचा को स्वस्थ रखता है इस पानी को पीने से डेड स्किन निकल जाती है और स्किन लंबे समय तक जवान रहती है।
- तांबे के बर्तन में रखें पानी से बैक्टीरिया नष्ट हो जाते हैं इसी कारण से तांबा डायरिया, दस्त, पेट की अन्य बीमारियों और पीलिया आदि को रोकने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
- यह पाचन क्रिया को एकदम ठीक रखता है। एसिडिटी बदहजमी और अपच को ठीक करता है।
- तांबे में बड़ी मात्रा में एंटी ऑक्सीडेंट होते हैं जो स्वभाविक कोशिकाओं के निर्माण की प्रक्रिया को तेज करते हैं । पुरानी कोशिकाएं खत्म होकर नई कोशिकाएं आ जाती हैं और उम्र बढ़ने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है। इससे बढ़ती उम्र के कारण चेहरे पर पड़ने वाली झुर्रियों को दूर रखता है। बाल झड़ने बंद हो जाते हैं।
- तांबे में यह गुण होते हैं कि वह हमारी रक्तचाप को सही रखने और दिल की धड़कनों को बैलेंस रखने में मदद करते हैं। तांबा हमारे शरीर के बुरे कॉलेस्ट्रोल को कम करता है इसलिए दिल की बीमारियों में तांबे में रखा पानी बहुत मदद करता है।
- तांबे में एंटी इन्फ्लेमेटरी गुण होते हैं जो दर्द से राहत देते हैं। तांबे में रखा जल यूरिक एसिड कम करने में मदद करता है जिससे गठिया के रोग में सूजन की वजह से होने वाले दर्द को राहत मिलती है।
- कैंसर के मरीज को तांबे में रखा जल बहुत मदद करता है क्योंकि इसका एक काम कोशिकाओं की सफाई भी है मृत कोशिकाओं को शरीर से निकालना और जीवित कोशिकाओं को बढ़ने में मदद करना। अमेरिकन कैंसर सोसायटी के अनुसार बहुत से तरीकों से तांबे में रखा हुआ जल कैंसर के इलाज में मदद करता है। बहुत अधिक एंटी ऑक्सीडेंट होने की वजह से कैंसर के रोग से लड़ने की क्षमता बढ़ाता है।
- यह जल थायरोक्सिन हार्मोन को नियंत्रित करता है जिससे थायराइड की बीमारी में बहुत मदद करता है।
- हमारा मस्तिष्क एक कोशिका तंत्रिका से दूसरी कोशिका तंत्रिका तक संदेश पहुंचाने से ही काम करता है यह तंत्रिका कोशिकाएं एक आवरण से ढकी रहती हैं इसी आवरण के तैयार होने में मदद करता है जिससे मस्तिष्क स्वस्थ रहता है और हमारी स्मरण शक्ति लंबे समय तक बनी रहती है। शरीर ठीक से काम करता है।
- यह खून की कमी को भी दूर करता है तांबा हमारे शरीर के पोषक तत्व को अवशोषित करने में मदद करता है इसीलिए इसमें रखे जल को पीने से एनीमिया की कमी दूर होती है यह आयरन को पचाने में बहुत मदद करता है।
किन लोगों को यह पानी नहीं पीना चाहिए :
खाली पेट टी बी, अल्सर और निमोनिया के मरीजों के लिए ठीक नहीं है।
जब कुछ लोगों को तांबे में रखा पानी सूट नहीं करता :
तो कैसे पता चलता है कि पानी सूट कर रहा है या नहीं चलो, जानते हैं कि इसके क्या लक्षण है।
पेट में हल्का दर्द होता है या मितली जैसा महसूस होता है।
- तांबे की तासीर थोड़ी गर्म होती है। जिनके शरीर की तासीर थोड़ी ज्यादा गर्म है उनको थोड़ा दिक्कत कर सकता है इसीलिए गर्मियों में तांबे के पात्र में चांदी की कोई चीज डाल देनी चाहिए इससे तांबे के तत्व कम हो जाएगें और लाभ भी मिलेंगे।
- अगर आपको कॉपर सूट नहीं कर रहा है तो इसका एक ही मतलब है कि आपके शरीर में पर्याप्त मात्रा में कॉपर है।
Ati uttam
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